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Need to relook Covid-19 testing strategy, experts advise Centre
In a third joint statement on the Covid-19 pandemic in India, a task force of eminent public health experts has advised the government that the experience from other countries indicates that increased testing does not prevent the deaths from Covid-19.
September 01, 2020 at 06:42AM
क्या आज से शुरू हो रही JEE के एग्जाम सेंटरों में बाढ़ का पानी भरा है? इस दावे से वायरल की जा रही फोटो का सच जानिए

क्या हो रहा वायरल : सोशल मीडिया पर कुछ फोटो वायरल हो रही हैं। फोटो में भारी बारिश के चलते सड़कों और घरों में हुआ जलभराव दिख रहा है। दावा किया जा रहा है कि ये फोटो नीट और जेईई परीक्षा केंद्रों की हैं। फोटो शेयर करते हुए सोशल मीडिया पर सरकार से सवाल पूछा जा रहा है कि जब परीक्षा केंद्रों की यह हालत है, तो फिर परीक्षा कैसे आयोजित होगी ?

देश भर के इंजीनियरिंग कॉलेजों में एडमिशन के लिए होने वाली JEE मेन्स मंगलवार से शुरू हो रही है। यह परीक्षा 6 सितंबर तक होनी है। वहीं मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश के लिए होने वाली NEET 13 सितंबर को होगी।

कोरोना संक्रमण के बीच हो रही इन दो परीक्षाओं को लेकर जहां पैरेंट्स परेशान हैं। वहीं, छात्रों ने लगातार परीक्षा पोस्टपोन करने की सरकार से मांग की थी। हालांकि, इसी बीच सोशल मीडिया पर इन परीक्षाओं को लेकर कई भ्रामक दावे भी किए जा रहे हैं।

चार फोटो वायरल हो रही हैं

1. पहली फोटो

एग्जाम सेंटर में जलभराव के दावे के साथ ये तस्वीरें पिछले एक सप्ताह से सोशल मीडिया पर शेयर की जा रही हैं।

2.दूसरी फोटो

इस फोटो को देखकर स्पष्ट हो रहा है कि ये कोरोना काल की नहीं है। कोई भी शख्स मास्क पहने नहीं दिख रहा। साथ ही पब्लिक ट्रांसपोर्ट संचालित होता दिख रहा है। जबकि इस समय अधिकतर राज्यों में पब्लिक ट्रांसपोर्ट बंद है।

3. तीसरी फोटो

जेईई परीक्षा आयोजित कराए जाने के लगातार हो रहे विरोध के पीछे दो वजह हैं। पहली देश भर में तेजी से बढ़ रहे कोरोना के मामले। और दूसरी, देश के कई हिस्सों में बाढ़ के हालात।

4. चौथी फोटो

चूंकि इस समय बिहार, मध्यप्रदेश, असम और छत्तीसगढ़ जैसे राज्य सच में बाढ़ का सामना कर रहे हैं। इसलिए एग्जाम सेंटरों में जलभराव के दावे को यूजर सच मानकर शेयर कर रहे हैं।

फोटो के साथ वायरल हो रहा मैसेज

This is the condition of examination centers and govt. wants to conduct exam's

हिंदी अनुवाद - परीक्षा केंद्रों की यह हालत है और सरकार परीक्षा आयोजित कराना चाहती है।

सोशल मीडिया पर किए जा रहे दावे

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फैक्ट चेक पड़ताल

नीट और जेईई के परीक्षा केंद्रों का बताकर चार फोटो वायरल हो रही हैं। हमने एक-एक करके हर फोटो की जांच शुरू की, तो बिल्कुल अलग ही सच्चाई निकल कर आई।

पहली फोटो का सच

गूगल पर फोटो को रिवर्स सर्च करने से कुछ मीडिया रिपोर्ट सामने आईं। जिनसे पता चलता है कि फोटो इलाहाबाद में हुई बारिश का है। फोटो में जलमग्न दिख रहा एमएल कॉन्वेंट स्कूल इलाहाबाद का ही है। न्यूज वेबसाइट पर उल्लेख नहीं है कि खबर किस समय की है। लेकिन, खबर में प्रयागराज का पुराना नाम ‘इलाहाबाद’ लिखा हुआ है।

उत्तरप्रदेश सरकार ने अक्टूबर, 2018 में इलाहाबाद का नाम बदलकर प्रयागराज रखे जाने को मंजूरी दी थी। तबसे मीडिया रिपोर्ट्स में भी शहर का नाम प्रयागराज ही लिखा जाता है। स्पष्ट है कि वायरल हो रही पहली फोटो दो साल से भी ज्यादा पुरानी है और इसका नीट-जेईई परीक्षा से कोई संबंध नहीं है।

दूसरी फोटो का सच

न्यूज-18 की वेबसाइट पर तीन साल पुरानी एक फोटो स्टोरी है। स्टोरी में 29 अगस्त, 2017 की देश भर की बड़ी घटनाओं की तस्वीरें हैं। यहां हमें वो दूसरी फोटो मिली। जिसे नीट-जेईई परीक्षा केंद्रों का बताया जा रहा है। असल में ये फोटो मुंबई में आई बाढ़ की है।

तीसरी फोटो का सच

दैनिक जागरण की वेबसाइट पर 4 अगस्त, 2019 की खबर से पता चलता है कि ये फोटो पिछले साल हरिद्वार में आई बाढ़ का है।

चौथी फोटो का सच

चौथी फोेटो को रिवर्स सर्च करने पर भी दैनिक जागरण की ही एक खबर हमारे सामने आई। 9 जुलाई, 2019 की इस खबर में फोटो को पटना में हुई बारिश का बताया गया है।

निष्कर्ष: JEE-NEET के परीक्षा केंद्रों का बताकर शेयर की जा रही तस्वीरें यूपी, बिहार, उत्तराखंड और महाराष्ट्र में आई बाढ़ की हैं। पुरानी तस्वीरों के आधार पर भ्रामक दावा किया जा रहा है कि परीक्षा केंद्रों में बाढ़ का पानी भरा है।

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Is the situation bad due to floods at NEET-JEE examination centers? Old pictures of floods in Uttarakhand, UP and Bihar go viral with false claims
गणपति बप्पा और प्रणब दा के साथ अगस्त की गमगीन विदाई, पितृ पक्ष के साथ अनलॉक की आजादी लिए आया है 2020 का 9वां महीना

1 सितंबर, साल का 245वां दिन। भारी मन से गणपति बप्पा की विदाई हो रही है और नम आंखों के साथ प्रणब दा को अलविदा कहना पड़ रहा है। फैसलों से लग रहा है कि ये 9वां महीना कई मायनों में कोरोना काल की लगभग समाप्ति का महीना रहेगा। ऐसे में आज पहले दिन थोड़े से बदले अंदाज के साथ मॉर्निंग न्यूज ब्रीफ ताकि आपका दिन बेहतर हो और दिमाग स्मार्ट तरीके से सोचे-

आज इन 10 बड़े इवेंट्स और खबरों पर रहेगी नजर

पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को आज अंतिम विदाई दी जाएगी। गृह नगर प.बंगाल की जगह नई दिल्ली में पूरे राजकीय सम्मान के साथ प्रणब दा का अंतिम संस्कार होगा।

देशभर में आज से कोरोना अनलॉक-4 शुरू हो रहा है। इसके तहत सबसे पहले टेकअवे बार खुलेंगे। 7 सितंबर से मेट्रो चलेंगी और 21 से थिएटर खुलने लगेंगे।

आज से ज्वॉइंट एंट्रेस एग्जाम JEE मेन शुरू हो रही है। तमाम विवादों के बीच इस इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा में करीब 10 लाख बच्चे बैठेंगे।

आज अनंत चर्तुदशी है,और देशभर में 10 दिन के गणेश उत्सव का समापन हो जाएगा। कोरोना संकट के कारण इस बार भव्य विसर्जन पर पाबंदी है।

आज से वंदे भारत मिशन का छठवां चरण शुरू होगा। कनाडा के टोरंटो, वैंकुवर और चीन के शंघाई से एयर इंडिया की 31 फ्लाइट्स से भारतीय स्वदेश लौटेंगे।

आज से पुराने दरों के हिसाब से ही EMI चुकानी होगी, क्योंकि मार्च में दी गई छूट खत्म हो गई है। एलपीजी रेट्स रिवाइज होंगे और हवाई यात्रा महंगी हो जाएगी।

आज से GST के भुगतान में देरी पर कुल टैक्स देनदारी पर 18% ब्याज लगेगा। GST काउंसिल की बैठक में यह निर्णय लिया गया था।

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर आज से कमोडिटी डेरिवेटिव्स में सिल्वर ऑप्शन में ट्रेडिंग की सुविधा लॉन्च की जाएगी।

आज से विदेशी खिलौने के लिए क्वॉलिटी कंट्रोल स्टैंडर्ड (QCS) लागू होंगे। अब अनिवार्य जांच के बाद ही खिलौनों को भारत में एंट्री मिलेगी।

आज वेस्पा अपना नया स्कूटर रेसिंग सिस्सटीज लॉन्च करेगी। सैमसंग फोल्डेबल फोन गैलेक्सी Z-फोल्ड 2 और हॉन्गकॉन्ग की टेक्नो स्पार्क गो 2020 उतारेगी।

कल की महत्वपूर्ण खबरें जो आप जानना चाहेंगे -

1. प्रणब दा के साथ एक युग का अंत

पूर्व राष्ट्रपति भारत रत्न प्रणब मुखर्जी हमें छोड़कर चले गए... 84 साल के प्रणब मुखर्जी की हालत 10 अगस्त के बाद से ही गंभीर थी। यूपीए के तारणहार और पीएम मोदी समेत संघ प्रिय प्रणब दा का जाना वाकई एक युग का अंत है। देश में 7 दिन का राष्ट्रीय शोक है और प्रणब दा को अंतिम विदाई के साथ उनकी हर उस बात को याद कर रहे हैं, जो दलों से ज्यादा दिलों को जोड़ती थी।

पढ़ें, प्रणब दा के जाने की खबर

2. इकॉनमी को 40 साल में सबसे बड़ा झटका

बस इसी खबर का डर कई महीनों से था, जीडीपी के मोर्चे पर भारत को 40 साल में पहली बार इतना बड़ा झटका लगा है ... देश में पहली तिमाही में जीडीपी की ग्रोथ रेट -23.9% रही है। भारत की अर्थव्यवस्था कहां है, इसे इस तरह से समझा जा सकता है कि जी-20 इकॉनमी वाले देशों में जीडीपी के मामले में सबसे खराब परफॉर्मेंस भारत की है।

पढ़ें, इस खबर काे विस्तार से

3. लद्दाख में 75 दिन बाद फिर तनातनी

चीन चाहता क्या है? एक तरफ सुलह है, तो दूसरी तरफ सुलगाने वाली हरकतें ... दो दिन पहले चीन ने फिर से पूर्वी लद्दाख के भारतीय इलाके में घुसपैठ की कोशिश की थी। भारतीय जवानों ने इसे नाकाम कर दिया। घुसपैठ को लेकर रक्षा मंत्रालय ने सोमवार को एक नोट जारी करके बताया है। चीन ने सीमा पर जे-20 फाइटर प्लेन भी तैनात किए हैं।

पढ़ें, चीन की नई चालबाजी

4. सिर्फ 1 रुपए में छूट गए प्रशांत भूषण

अहं और न्याय के टकराव के बीच, न्यायपालिका के गलियारों का दिलचस्प केस 1 रुपए में सुलट गया…सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने कन्टेम्प्ट ऑफ कोर्ट मामले में सीनियर एडवोकेट प्रशांत भूषण पर सिर्फ एक रुपए का जुर्माना लगाया। भूषण माफी न मांगने पर अड़े थे और कोर्ट माफी न देने पर डटी थी। अब इस फैसले पर कहा जा रहा कि कोर्ट के सामने भूषण की हैसियत 1 रुपए के बराबर ही तो है।

पढ़ें कि ये कितना अजब केस था

5. सुशांत केस में सीबीआई के 11 दिन

जून से सितंबर आ गया, सुशांत केस जाने कौन सी थ्योरी पर जाकर क्रैक होगा....अब इस मामले में सक्षम कही जाने वाले सीबीआई को भी कुछ सूझ नहीं रहा। सोमवार को इस मामले में सीबीआई जांच 11वां दिन था और रिया को घेरने का चौथा दिन। कुल 35 घंटे की दिल-दिमाग हिला देने वाली पूछताछ के बाद भी अभी सब कुछ उलझा हुआ है। नजर बनी रहेगी कि कौन सी थ्योरी सच साबित होती है।

पढ़ें, सीबीआई ने क्या किया

6. कोरोना LIC का कुछ नहीं बिगाड़ पाया

65वें बर्थडे पर देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी LIC से जुड़ी ये खबर एक टॉकिंग पाइंट है… कोरोना काल के बावजूद आज अपने 64 साल पूरे कर रही इस सरकारी कंपनी पर निवेशकों का भरोसा कायम है और बढ़ भी रहा है। आंकड़े कहते हैं कि 2019-20 में LIC ने 2.19 करोड़ नई पॉलिसी बेची हैं, जो 6 साल में रिकॉर्ड है। क्लेम सेटलमेंट में 159,770.32 करोड़ रुपए का भुगतान किया और 215.98 लाख दावे निपटाए गए।

पढ़ें कि LIC ने ये कैसे किया

7. वायरस के लिए एक डोज काफी नहीं

थोड़ा परेशान करने वाली खबर क्योंकि कोरोना की एक वैक्सीन लगवाने से कुछ नहीं होगा… ये बात अमेरिकी विशेषज्ञ कह रहे हैं कि आने वाले दिनों में जब वैक्सीन आएगी तो उसके केवल एक डोज से काम नहीं चलेगा। लोगों को दो डोज की जरूरत पड़ेगी। मौजूदा समय में ही टेस्टिंग किट, पीपीई किट और दूसरी जरूरी चीजों की कमी है। ऐसे में दो बार वैक्सीनेशन का प्रोग्राम चलाना बड़ा मुश्किल होगा।

पढ़ें, दुनिया में कोरोना के हाल

अब जान लेते हैं कि 1 सितंबर के इतिहास में क्या खास रहा …

दूसरे विश्वयुद्ध के समय की तस्वीर जिसमें तानाशाह हिटलर सेना को मार्च करते देख रहा।

01 सितंबर 1939 को 15 लाख सैनिकों के साथ हिटलर की जर्मन सेना ने पोलैंड पर हमला बोला था और इसी के साथ शुरू हुआ था दूसरा विश्व युद्ध। इसमें करीब 5 करोड़ लोगों की जान गई थी।

1947 में आज ही के दिन इंडियन स्टैंडर्ड टाइम (IST) अस्तित्व में आया था। हमारा IST इंग्लैंड के ग्रीनविच के स्टैंडर्ड टाइम से साढ़े पांच घंटे आगे है ! मतलब इंग्लैंड में जब दोपहर के 12 बजते हैं, तब भारत में शाम के 5:30 बजे का समय होता है।

आज ही के दिन 1933 में उत्तरप्रदेश के बिजनौर में मशहूर कवि और गज़ल लेखक दुष्यंत कुमार का जन्म हुआ था। सिर्फ 42 साल की उम्र में बहुत धारदार रचनाओं की विरासत छोड़ दुष्यंत कुमार दुनिया से रुखसत हो गए थे।

आखिर में दुष्यंत कुमार की गजल ‘ये जो शहतीर है पलकों पे उठा लो यारो’ की चार पंक्तियां जो कहती हैं कि चाहो तो सब संभव है

रहनुमाओं की अदाओं पे फ़िदा है दुनिया

इस बहकती हुई दुनिया को संभालो यारो

कैसे आकाश में सुराख़ नहीं हो सकता

एक पत्थर तो तबीयत से उछालो यारो

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september 2020; Pranab Mukherjee passes away, JEE exam starts and sushant case CBI probe, corona vaccine trial and big news updates with Dainik Bhaskar Morning Briefing Today
अगर हम गणेश जी के एक-एक अंग को देखें, तो वे हमें सही जीवन जीने का तरीका सिखाते हैं

कोई भी अच्छा काम शुरू करने से पहले कहते हैं श्रीगणेश करो। मतलब हर कार्य की शुरुआत गणेश की स्थापना से करते हैं। लेकिन क्या सिर्फ उनको याद करना ही काफी है। हम सिर्फ गणेश जी की महिमा ना गाएं, बल्कि खुद ही श्रीगणेश जैसे बन जाएं।

गणेश जी के अगर हम एक-एक अंग को देखें, तो वे हमें सही जीवन जीने का तरीका सिखाते हैं। गणेश जी का मस्तक बड़ा दिखाया जाता है। जो दिव्य और विशाल बुद्धि का प्रतीक है। उनकी आंखें बहुत छोटी दिखाई जाती हैं। मतलब जो दिव्य बुद्धि वाला होगा वो दूरांदेशी होगा। मतलब कर्म करने से पहले उस कर्म के परिणाम के बारे में सोचना।

गणेश जी का छोटा मुंह होना यह बताता है कि हमें कम बोलना है। लेकिन कान बड़े हैं मतलब ज्यादा सुनना और अच्छी बातों को ग्रहण करना है। फिर गणेश जी का एक दांत टूटा हुआ दिखाते हैं। आज हमारे जीवन में दोहरापन है। जहां अहंकार होगा वहां दोहरापन होगा। परमात्मा यही सिखाते हैं कि मैं आत्मा हूं, तुम भी एक आत्मा हो। इससे हमारा विश्व एक परिवार बन जाता है।

जब यह दिव्यता जीवन में आ जाती है तब दोहरापन खत्म हो जाता है। फिर गणेश जी की सूंड दिखाते हैं। उसकी विशेषता है कि वह एक पेड़ भी उखाड़ लेती है तो एक बच्चे को भी प्यार से उठा लेती है। मतलब आत्मा जो दिव्य बन जाएगी, वो बहुत विनम्र होगी, लेकिन बहुत शक्तिशाली भी होगी।

आध्यात्मिकता का मतलब है, जीवन में सम्पूर्ण संतुलन। विनम्र लेकिन बहुत शक्तिशाली। फिर गणेश जी का पेट बड़ा दिखाते हैं। माना जाता है दिव्य आत्मा वह है जो हर बात को अपने पेट में समा ले। जबकि जो सारी बातें सभी से कहते रहते हैं, उनके लिए कहते हैं कि इसके पेट में कोई बात नहीं पचती।

फिर गणेश जी की चार भुजाएं दिखाते हैं। एक भुजा में कुल्हाड़ी है। मतलब परमात्मा से मिली ज्ञान की कुल्हाड़ी, जिससे अपनी बुराईयां, नकारात्मकता को काटना है। दूसरे हाथ में रस्सी है। जो यह बताती है कि सही सोच, सही बोल, सही कर्म, सही खान-पान, सही धन कमाने का तरीका, इन्हें मर्यादाओं की रस्सी से बांध लो।

फिर तीसरे हाथ को आशीर्वाद देते हुए दिखाते हैं। जो यह बताता है कि हमारा हाथ सदैव देने की मुद्रा में होना चाहिए। मतलब कोई भी आत्मा आए, उसका कैसा भी व्यवहार हो हमारे मन में उनके लिए सिर्फ शुभकामना के संकल्प ही आएं।

फिर चौथे हाथ में मोदक है। लेकिन गणेश जी उसको खाते नहीं हैं हाथ में रखते हैं। इसका मतलब है सफलता मिलेगी लेकिन महिमा को स्वीकार नहीं करना है। अहंकार नहीं करना है। सफलता को सिर्फ हाथ में ही रखना है। फिर गणेश जी को बैठा हुआ दिखाते हैं। जिसमें एक पैर मुड़ा हुआ होता है और एक पैर नीचे होता है। जो पांव नीचे होता है उसका भी सिर्फ अंगूठा नीचे छूता है।

मतलब इस दुनिया में रहना है तो पांव नीचे। हमें सबकुछ करना है, सारे रिश्ते निभाने हैं, कारोबार करना है लेकिन सबसे डिटैच भी रहना है। किसी के संस्कार के प्रभाव में आकर मूल्यों को नहीं छोड़ना है।

श्रीगणेश का वाहन चूहा दिखाते हैं। हम देखें तो चूहा सारा दिन कुछ न कुछ कुतरता रहता है। ये हमारी कर्म इंद्रियों का प्रतीक है। सारा दिन कुछ भी देख रहे हैं, सुन रहे हैं, कुछ भी खा रहे हैं, नहीं भी जरूरत है तो पीते जा रहे हैं। दूसरा, चूहा छोटी-सी जगह से अंदर घुस जाता है। उसी तरह हमारे जीवन में बुराईयां, खिंचाव, कमजोरियां, पता ही नहीं चलता है कि कब आ जाती हैं। दर्द तो बहुत बाद में होता है।

आज हम सब जीवन में बड़ी मेहनत कर रहे हैं। खुशी, स्वास्थ्य, रिश्तों और काम के लिए। हमें अपने लिए समय ही नहीं मिलता है मतलब हम अपनी दुनिया को ही नहीं संभाल पा रहे हैं। लेकिन जिसका संबंध परमात्मा के साथ होगा उसकी हर सोच शुद्ध, हर शब्द सही होगी। तो गणेश जी हमें जीवन जीने का तरीका सिखाते हैं। जो आत्मा ये सब कुछ कर लेती है उसको विघ्नविनाशक कहते हैं। हम सबको विघ्नविनाशक आत्मा बनना है। सबके दुःख हरके इस सृष्टि पर सुख लाना है।

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शिवानी दीदी, ब्रह्मकुमारी
बच्चे पैंगोंग झील के पास बेखौफ घूम रहे, पर्यटकों के लिए भी खुल गया फिंगर-4 के नजदीक का यह गांव, लोग बोले- अब सब नॉर्मल

(मोरुप स्टैनजिन) चीन के साथ जारी तनाव के बीच लद्दाख के आखिरी रहवासी गांव मान-मेराक में अब जिंदगी पहले जैसी हो गई है। सभी प्रकार की पाबंदियां हटा ली गई हैं। संचार व्यवस्था बहाल हो गई है और पर्यटकों के लिए भी अब कोई रोक-टोक नहीं है। 2 महीने पहले यहां दोनों देशों की सेनाएं आमने-सामने थीं।

तनाव के गवाह रहे फिंगर-4 इलाके के पास स्थित पैंगोंग झील अब फिर से बच्चों और स्थानीय लोगों से गुलजार है। यहां आसपास के लोगों से बात करो तो कहते हैं- इंडियन आर्मी ने चीनियों को पीछे खदेड़ दिया है। अब डरने जैसी कोई बात नहीं है।

'सर्दियों में लोग पहले की तरह अपने मवेशी फिंगर फोर तक ले जा सकेंगे'

एरिया काउंसलर (स्थानीय जनप्रतिनिधि) स्टैनजिन कॉनचॉक के मुताबिक, 15-16 जून गलवान घाटी की घटना के 2 महीने बाद तक यहां के लोगों ने सेना की सख्त पहरेदारी में जिंदगी गुजारी है। लेकिन, अब जीवन सामान्य हो रहा है। सेना और स्थानीय लोग मिलकर सड़क और भवनों के निर्माण में युद्धस्तर पर लगे हुए हैं क्योंकि सर्दियां शुरू होते ही काम करने में दिक्कत आएगी।

स्टैनजिन ने बताया, हमने नोटिस किया है कि चीनी पीछे हट रहे हैं। इंडियन आर्मी इलाके में नियमित रूप से पेट्रोलिंग कर रही है। गांव मान-मेरक की सरपंच देचेन डोलकर कहती हैं कि अब यहां सबकुछ नॉर्मल है। मुझे उम्मीद है कि आने वाली सर्दियों में लोग पहले की तरह अपने मवेशी फिंगर फोर तक ले जा सकेंगे।

'यहां सबकुछ पहले जैसा है, लोग अपने काम में व्यस्त हैं'

इलाके की पूर्व काउंसलर और चुशुल निवासी सोनम सेरिंग कहती हैं कि स्थानीय लोगों में यह मजबूत धारणा है कि सर्दी शुरू होने पर चीन फिर अपनी हरकत पर उतर सकता है। ऐसे में दोनों देशों के बीच नई झड़प हो सकती है। हालांकि, हम इंडियन आर्मी की मौजूदगी से सुरक्षित महसूस भी कर रहे हैं।

पैंगोंग झील के पास रहने वाले ताशी मोतुप बताते हैं कि जब चीनी फिंगर फोर पर दाखिल हुए, तो हम सब बुरी तरह से घबरा गए थे। गलवान की घटना के बाद पूरे इलाके में दहशत और बेचैनी थी। लेकिन, अब यहां सबकुछ पहले जैसा है। हम लोग अपने काम में व्यस्त हैं।

गलवान के बाद 245 करोड़ का बजट जारी

गलवान की घटना के बाद इस गांव के आसपास तेजी से सड़कों और भवनों का निर्माण हो रहा है। लद्दाख के लेफ्टिनेंट गवर्नर आर के माथुर ने 129 करोड़ का चांगथांग पैकेज जारी किया है। स्पेशल डेवलपमेंट के लिए अतिरिक्त 91.97 करोड़ का फंड निकाला गया है। बॉर्डर एरिया डेवलपमेंट प्रोग्राम के लिए 23 करोड़ रुपए जारी किए गए। शुक्रवार को कुल मिलाकर इस क्षेत्र के लिए 245 करोड़ का बजट जारी किया गया है।

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तनाव के गवाह रहे फिंगर-4 इलाके के पास स्थित पैंगोंग झील अब फिर से बच्चों और स्थानीय लोगों से गुलजार है।
कश्मीर में आठ महीने में तनाव से जूझ रहे 18 जवानों ने की खुदकुशी, पिछले साल से बढ़े आंकड़े, छह जवानों की साथी ने ही उन्मादी हमला कर जान ली

(मुदस्सिर कुल्लू) कश्मीर में सुरक्षाबलों में खुदकुशी और अपने ही साथी की हत्या कर देने के मामले बढ़ते जा रहे हैं। इस साल के शुरुआती 8 महीने में कश्मीर में 18 जवानों ने आत्महत्या की है। जबकि 6 जवान अपने ही साथी के उन्मादी हमले में मारे गए हैं। सेना, पैरामिलिट्री फोर्स के सूत्रों ने यह जानकारी दी है।

उन्होंने बताया कि पिछले पूरे साल में कश्मीर में 19 जवानों ने आत्महत्या की थी। जबकि इस बार आत्महत्या के आंकड़े 8 महीने में ही करीब बराबरी पर आ गए। इन मामलों का कारण यह है कि सुरक्षाकर्मियों को जरूरत से ज्यादा दैनिक ड्यूटी करनी पड़ रही है। वे परिवार से लंबे समय तक दूर रहने को मजबूर हैं। ऐसे में वे तनाव और डिप्रेशन का शिकार हो रहे हैं।

वे जवान ज्यादा परेशान हैं जो सीधे तौर पर आतंकवाद विरोधी अभियानों के लिए तैनात हैं। कई बार उनका धैर्य टूट जाता है।

कोरोना का डरः मई में एक ही दिन में सीआरपीएफ के एसआई और एएसआई ने खुदकुशी कर ली

इस साल आत्महत्याओं का एक बड़ा कारण कोरोना संकट भी बताया जा रहा है। खासकर सीआरपीएफ के दो मामलों में यह बात खुलकर सामने आई है। सूत्रों के मुताबिक, 12 मई को अनंतनाग जिले के अक्रुर्ण मट्‌टन क्षेत्र में सीआरपीएफ के एक सब इंस्पेक्टर ने अपनी सर्विस राइफल से गोली मारकर खुदकशी कर ली थी।

सब इंस्पेक्टर ने सुसाइड नोट में लिखा था, ‘मैं डरा हुआ हूं। मैं कोरोना पॉजिटिव हो सकता हूं। बेहतर है मर जाऊं।’ उसी दिन श्रीनगर के करण नगर इलाके में सीआरपीएफ के एक असिस्टेंट सब इंस्पेक्टर ने भी गोली मारकर आत्महत्या कर ली थी। यह मामला भी कोरोना के डर से जुड़ा बताया जा रहा है। ऐसे अन्य मामले भी होने की आशंका है।

उपाय: जवानों के लिए काउंसिलिंग सेशन, मानसिक व्यायाम को बढ़ावा

श्रीनगर में सीआरपीएफ के जनसंपर्क अधिकारी पंकज सिंह ने बताया कि जवानों को तनाव मुक्त करने के लिए लगातार काउंसलिंग सेशन चलाए जा रहे हैं। इसके अलावा सुबह के व्यायाम में उन गतिविधियों पर जोर दिया जा रहा है, जिनसे मानसिक स्वास्थ्य को फायदा हो। दूसरी ओर एक अधिकारी ने कहा कि शीर्ष अधिकारी ऐसी व्यवस्था करें कि उनके साथी लंबे समय तक परिवार से दूर रहने को मजबूर न हों। वे परिवार के साथ पर्याप्त समय बिता सकें।

दावा: विशेषज्ञ बोले- पारिवारिक समस्याएं आत्महत्या का बड़ा कारण

कश्मीर के मनोचिकित्सक डॉ. यासिर हसन राथर का कहना है कि हर महीने उनके पास कई जवान मानसिक समस्याओं के इलाज के लिए आते हैं। वे बताते हैं कि कैसे वे कड़ी कार्य संस्कृति से परेशान हैं। उन्हें कई बार जरूरी काम के लिए भी वक्त नहीं मिल पाता।

मानसिक स्वास्थ्य सलाहकार वसीम राशिद का कहना है कि जवान लंबे समय तक पारिवारिक समस्याओं को हल नहीं कर पाने के कारण तनाव में रहते हैं। ऐसे में वे कभी-कभी आत्महत्या का रास्ता अपना लेते हैं।

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इस साल आत्महत्याओं का एक बड़ा कारण कोरोना संकट भी बताया जा रहा है। (फाइल फोटो)
1,250 मंदिरों का संचालन करने वाले त्रावणकोर देवस्वाम बोर्ड को 300 करोड़ का नुकसान, अब बोर्ड अपने सोने को नकद में बदलेगा

(केपी सेतुनाथ). केरल के प्रसिद्ध सबरीमाला मंदिर का संचालन करने वाला त्रावणकोर देवस्वाम बोर्ड तंगहाली दूर करने के लिए अपने सोने को नगदी में बदलने जा रहा है। वहीं, तिरुमाला देवस्थानम बोर्ड जम्मू में भव्य वेंकटेश्वर मंदिर बनाने जा रहा है।

त्रावणकोर देवस्वाम बोर्ड भारतीय रिजर्व बैंक की स्वर्ण बांड योजना में शामिल होगा ताकि बोर्ड के देशभर मेें 1,250 मंदिरों का रख-रखाव और उसका संचालन सही तरीके से हो सके। योजना के तहत बोर्ड को जमा किए गए सोने के एवज में 2.5% वार्षिक ब्याज मिलेगा।

फिलहाल बोर्ड सोने की मात्रा का आकलन कर रहा है

त्रावणकोर देवस्वाम बोर्ड के अध्यक्ष एन वासु ने बताया कि इसके लिए केरल हाईकोर्ट से मंजूरी मांगी गई है। फिलहाल बोर्ड सोने की मात्रा का आकलन कर रहा है। हमें उम्मीद है कि एक महीने में यह प्रक्रिया पूरी हो जाएगी और योजना को अंतिम रूप दे दिया जाएगा। कोरोना महामारी के चलते मंदिर बंद होने के कारण बोर्ड को करीब 300 करोड़ रुपए का नुकसान उठाना पड़ा है।

अब यहां श्रद्धालुओं का सीमित संख्या में जुटना शुरू हो गया है

मंदिरों के पास पूजा और अनुष्ठानों के लिए प्राचीन और विरासती जेवर हैं, उन्हें इसमें शामिल नहीं किया जाएगा। हालांकि, बोर्ड के सभी मंदिरों को पांच माह बाद श्रद्धालुओं के लिए 17 अगस्त को खोल दिया गया है। अब यहां श्रद्धालुओं का सीमित संख्या में जुटना शुरू हो गया है।

फिलहाल 3,500 कर्मचारियों को वेतन देने के लिए काफी जद्दोजहद करनी पड़ रही है

वासु ने कहा कि बोर्ड के पास मौजूद कुल सोने की मात्रा बता पाना अभी संभव नहीं है, क्योंकि आकलन प्रक्रिया जारी है। संभावना है कि कम से कम 1,000 किग्रा सोना तो होगा ही। बोर्ड 1,250 मंदिरों का संचालन करता है और फिलहाल 3,500 कर्मचारियों को वेतन देने के लिए काफी जद्दोजहद करनी पड़ रही है।

सिर्फ 100 मंदिर ही ऐसे हैं, जिनसे अच्छी आवक होती है जबकि शेष मंदिरों का संचालन इन्हीं 100 मंदिरों को मिले दान पर निर्भर होता है। बोर्ड को सबरीमाला मंदिर से ही सबसे ज्यादा चढ़ावा मिलता है। साल 2019-20 में मंदिर ने तीर्थयात्रा सीजन में 263.57 करोड़ रुपए कमाए थे, जबकि 2018-19 में 179.23 करोड़ रुपए की कमाई हुई थी।

100 एकड़ में बनेगा तिरुपति बालाजी मंदिर, अस्पताल और वैदिक स्कूल भी
इधर, तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम बोर्ड जम्मू-कटरा हाईवे पर भव्य वेंकटेश्वर मंदिर बनाने जा रहा है। इसके लिए जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने हाईवे पर करीब 100 एकड़ जमीन देने पर सहमति जता दी है। बोर्ड के चेयरमैन वायवी सुब्बा रेड्‌डी ने बताया कि इस मंदिर के बनने से माता वैष्णो देवी के दर्शन के लिए हर वर्ष आने वाले लाखों श्रद्धालु वेंकटेश्वर भगवान के भी दर्शन कर सकेंगे। बोर्ड जम्मू में मंदिर के अलावा अस्पताल, वैदिक पाठशाला और शादी गृह का भी निर्माण करेगा।

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तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम बोर्ड जम्मू-कटरा हाईवे पर भव्य वेंकटेश्वर मंदिर बनाने जा रहा है। इसके लिए जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने हाईवे पर करीब 100 एकड़ जमीन देने पर सहमति जता दी है।