Recents in Beach

Showing posts with the label Dainik Bhaskar September 13Show all
एनसीबी अधिकारी का दावा- रिया के खिलाफ ठोस सबूत और केस मजबूत, उन्हें 20 साल की जेल हो सकती है

सुशांत सिंह राजपूत डेथ केस से जुड़े ड्रग्स मामले में रिया चक्रवर्ती को 20 साल तक की सजा हो सकती है। नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के एक अधिकारी ने दैनिक भास्कर को ऑफ द रिकॉर्ड दिए इंटरव्यू में यह बताया। अधिकारी के मुताबिक, उनके पास रिया के खिलाफ ठोस सबूत हैं और केस काफी स्ट्रॉन्ग बन चुका है। यही वजह है कि लोअर और सेशन कोर्ट से रिया को जमानत नहीं मिल सकी। उनसे हुई बातचीत के प्रमुख अंश :-

Q. रिया और शोविक ने बॉलीवुड के किन नामों का खुलासा किया है?
A. अभी उन नामों को रिवील नहीं कर सकते। क्योंकि जांच जारी है। पहले इसे किसी निष्कर्ष पर पहुंच जाने दीजिए। अभी उनका नाम उजागर करना उनकी अवमानना होगी।

Q. ड्रग्स की कितनी क्वांटिटी रिया ने कैरी की थी?
A. यह सिर्फ 59 ग्राम ड्रग्स की बात नहीं है, जिसके बारे में रिया ने बताया है। हमारी टीम ने अनुज केसवानी से कमर्शियल क्वांटिटी में ड्रग्स बरामद की है। हम इस लीड पर आगे बढ़ रहे हैं। हमारा केस मजबूत है। यही वजह है कि माननीय लोअर और सेशन कोर्ट से उनकी जमानत याचिका खारिज हुई है।

Q. पूरे मामले में रिया का डायरेक्ट इन्वॉल्वमेंट तो कहा ही जा सकता है?
A. इन्वॉल्वमेंट साजिश को लेकर है। चार्जेज उसी तौर पर लगे हैं। उससे रिलेटेड ऑर्डर भी सार्वजनिक हैं।

Q. लेकिन रिया बार-बार दावे कर रही हैं कि वो ड्रग्स नहीं लेती थीं। वे तो इसे सुशांत के कहने पर मंगवा रही थीं?
A. मैटर विचाराधीन है। इसलिए इस मसले पर कुछ भी कहना अभी सही नहीं होगा।

Q. सुशांत तो अब रहे नहीं, तो कैसे साबित करेंगे कि उन्‍होंने ड्रग्स कंज्यूम किया था?
A. यह साबित हो जाएगा। उसकी चिंता मत करें। वही तो हमारा जॉब है। तभी तो जांच प्रक्रिया पर हम कुछ भी नहीं कहना चाहते।

Q. क्‍या ड्रग्स मामले में कंगना का भी टेस्‍ट होगा?
A. वो हमें नहीं मालूम। हमारा फोकस इस केस (सीआर नं. 15) पर है। कंगना के बारे में हम कुछ नहीं कह सकते, क्‍योंकि उनका मामला हमारे केस से कनेक्टेड ही नहीं है।

Q. बीते सालों में आपके जो ऑपरेशन्स रहे हैं, उनमें बॉलीवुड से कौन से ए-लिस्‍टर्स के नाम आए थे? बड़ी मछलियों की धड़पकड़ हो पाएगी?
A. यह गलत हो रहा है कि सिर्फ एक सोसायटी का नाम लिया जा रहा है। हमारा मैंडेट इस सोशल प्रॉब्लम को ठीक करना है। महज एक सोसायटी के पीछे पड़ना नहीं। मुंबई में यह बुरी तरह फैला हुआ है। यह एक केस है, जिसे एनडीपीएस एक्ट के तहत सजा के दायरे में लाना है। हम सिर्फ कुछ लोगों को पकड़ने के पीछे नहीं लगे हैं। हम हर किसी को टार्गेट कर रहे हैं।

Q. क्‍या यह स्टेब्लिश हो चुका है कि रिया और शोविक ड्रग पैडलर्स के सतत संपर्क में थे?
A. इस वक्‍त क्‍या बोलूं। मैटर कोर्ट में है। सारे सबूत हमें कोर्ट में देने हैं। इसलिए जांच से जुड़ी कोई बात रिवील करना सही नहीं है।

Q. कोर्ट में सबूत कब प्रोड्यूस करेंगे?
A. अभी तो उनकी बेल रिजेक्ट हुई है। फिलहाल ट्रायल चलेगा। चार्जशीट फाइल करने के लिए एनसीबी के पास 180 दिनों का वक्‍त है। चूंकि कमर्शियल क्वांटिटी का मामला है। लिहाजा हम अपनी इनवेस्टीगेशन पूरी करेंगे। तब सबूत पेश करेंगे।

Q. लेमैन लैंग्वेज में कमर्शियल यूज को कैसे समझाएं?
A. एक होती है स्मॉल क्वांटिटी, दूसरी मिडिल और तीसरी कमर्शियल क्‍वांटिटी। कमर्शियल क्‍वांटिटी अगर साबित हो गई तो 20 साल की सजा हो सकती है। मिडिल क्वांटिटी है तो 10 और स्मॉल का मामला है तो 1 साल की सजा।

Q. रिया के मामले में बड़ी क्वांटिटी है?
A. जी हां। इसी केस में हमारे द्वारा गिरफ्तार किए गए उनके सप्लायर से हमें बड़ी क्वांटिटी मिली है।

Q. यह सप्लाई सुशांत की मौत तक होती रही है?
A. जिस पैडलर को हमने पकड़ा है, वह तो मेजर सप्लायर है ही। हम यह लिंक नहीं कर रहे है कि सप्लाई कब तक होती रही? हमने तो एक गैंग को बर्स्‍ट किया है।

Q. लेकिन रिया तो कुछ भी एक्सेप्ट नहीं कर रही हैं?
A. इस बारे में मैं कुछ नहीं बोल सकता। ऐसा करना कंटेम्प्ट ऑफ कोर्ट है।

Q. हालांकि शोविक ने तो बहुत जल्दी मान लिया था कि वो ड्रग्स लाया करते थे?
A. सच कहूं तो मीडिया में 90 फीसदी जानकारी गलत आ रही है। नामों को लेकर सिर्फ कयास लगाए जा रहे हैं। हमें हमारा काम करने दीजिए। चार्जशीट के टाइम पर सारे नाम सामने आ जाएंगे। अभी किसी का नाम लेने से जांच प्रभावित होगी।

Q. अगर लोकल पुलिस ने प्राइमरी लेवल पर ही सबूत टैंपर कर दिए हों तो जांच एजेंसियां गुनहगारों को कैसे पकड़ पाएंगी? सबूत टैंपर होने के चलते न तो आरुषि के हत्यारों का पता चल सका, न सुनंदा पुष्कर के?
A. हमें ऐसी कोई दिक्कत नहीं हुई। हमारा केस बहुत स्ट्रॉन्ग बन चुका है। हम साबित कर देंगे।

Q. क्‍या ड्रग्स की ज्यादा मात्रा लेने से मौत होती है?
A. इस पर मैं कुछ नहीं कह सकता। यह कहना बहुत जेनेरिक होगा। हरएक का इलाज अलग होता है। हर किसी के लक्षण भी अलग होते हैं।

Q. मारिजुआना तो बड़ा क्राइम नहीं है न?
A. हम हर तरह के ड्रग्स को समान भाव से देख रहे हैं। कमर्शियल क्वांटिटी के थ्रेशहोल्ड अलग-अलग होते हैं।

Q. पांच या दस साल पहले भी क्या कभी इस तरह के केसेज में बॉलीवुड से किसी का नाम आया था?
A. वह मैं अभी नहीं बोल सकता। यह जांच का विषय है।

Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today

रिया चक्रवर्ती को एनसीबी ने 9 सितंबर को अरेस्ट किया था। फिलहाल, वे भायखला जेल में बंद हैं।

https://ift.tt/3htrqKi
एक्सपर्ट बोले- बिहारी वोटर्स में कंगना रनोट को लेकर क्यूरोसिटी नहीं, भाजपा बोली- हम मंच नहीं देंगे

सुशांत सिंह राजपूत के लिए न्याय की मांग कर रहीं कंगना रनोट लगातार मुंबई पुलिस और महाराष्ट्र सरकार के निशाने पर हैं। इस बीच ऐसी खबरें हैं कि बिहार चुनाव के मद्देनजर वहां होने वाली वर्चुअल रैलियों में कंगना को लाया जा सकता है। हालांकि, बिहार के पत्रकार, साहित्यकार और खुद बीजेपी के नेताओं का मानना है कि कंगना को चुनाव प्रचार में उतारने से कोई फायदा नहीं होगा। उन्होंने इसके पीछे की वजह दैनिक भास्कर के साथ साझा की।

बिहार में जातिगत समीकरण आज भी हावी

राष्‍ट्रीय पुरस्कार से सम्‍मानित फिल्‍म समीक्षक और साहित्यकार विनोद अनुपम वोटर्स की सोच को डिकोड करते हैं। वे कहते हैं, "सुशांत सिंह राजपूत के लिए कंगना रनोट की लड़ाई और भाजपा के साथ बढ़ते उनके संबंध देख बिहार के चुनाव में उनकी सक्रियता की उम्मीद जरूर बढ़ गई है। लेकिन ऐसा नहीं कहा जा सकता कि बिहार के वोटर्स में इसे लेकर क्यूरोसिटी है। बल्कि यह कहना भी मुश्किल है कि सुशांत की मौत भी चुनावी मुद्दा रहेगी।"

कंगना सिर्फ जाति विशेष तक सीमित

अनुपम ने आगे कहा, "बिहार में हमेशा से ही चुनाव अलग धरातल, अलग मुद्दे पर होते रहे हैं। यहां सुनी सबकी जाती है, लेकिन अंतिम ध्रुवीकरण में जाति की भूमिका प्रबल हो जाती है। ऐसे में कंगना एक जाति विशेष को एकजुट करने के लिए भले बुलाई जा सकती हैं। लेकिन इस बात से सहमत नहीं हुआ जा सकता कि उनकी कोई बड़ी भूमिका होगी।"

सितारों के आने से कोई फर्क नहीं पड़ता

बकौल अनुपम, "बिहार के चुनाव में पहले भी सितारे आते रहे हैं। अजय देवगन से लेकर नगमा तक। लेकिन लोगों ने उन्हें बिल्कुल भी तवज्जो नहीं दी। 2015 के चुनावी प्रचार में अजय देवगन आए और चले गए। अगले दिन अखबारों में कायदे से खबर तक नहीं लग सकी थी। चर्चा में भी आए तो भगदड़ के चलते। बिहार भाजपा के नेताओं ने भी तव्वजो नहीं दी थी।"

अनुपम आगे कहते हैं, "बिहारी राजनेताओं के मुंह से मिमिक्री मंजूर करते हैं, लेकिन अभिनेताओं की परफॉरमेंस को वे भाव नहीं देते। प्रकाश झा तो विशेष राज्‍य की मांग को लेकर धरने पर भी बैठे थे, लेकिन उन्‍हें पार्टी से तव्वजो नहीं मिली थी।"

मिडिल क्‍लास आज भी निर्णायक नहीं

अनुपम के मुताबिक, "बिहार में मिडिल क्लास अभी भी चुनाव में निर्णायक नहीं है, जिन्हें कंगना या सुशांत से मतलब है। यहां निर्णायक जरूरतमंद वोटर हैं ,जिनका पहला सवाल होता है मिलेगा क्या? वैसे भी इस बार बिहार में चुनाव को लेकर वोटर्स में अजीब सी निरपेक्षता देखी जा रही है।

राजनीतिक दलों के लिए चुनाव बाध्यता है और वोटर्स को लग रहा वे निरर्थक ही खतरे में धकेले जा रहे हैं। ऐसे में दलों का सारा जोर बूथ प्रबंधन पर है। एक बात यह भी कि जब सारी रैलियां वर्चुअल हो रही हैं और कंगना पहले से ही हर दिन वर्चुअल दिखाई दे ही रही हैं। ऐसे में बिहार के वोटर्स उनकी प्रतीक्षा क्यों करेंगे?

पॉलिटिकल वैल्यू बनी रहना बड़ी बात

जाने-माने पत्रकार पुष्य मित्र भी विनोद अनुपम से इत्तफाक रखते हैं। वे कहते हैं, "टीवी मीडिया में छाए रहने से कंगना की पॉलिटिकल वैल्यू जरूर काफी बढ़ गई है। लेकिन यह दावे के साथ नहीं कहा जा सकता कि यह सब बिहार चुनाव के प्रचार अभियान तक बरकरार रहेगा। अमूमन ऐसा देखा गया है कि टीवी मीडिया द्वारा तैयार किए गए स्टार की मियाद बहुत कम रहती है।

ज्यादा खींचा जा चुका सुशांत का मुद्दा

पुष्य मित्र ने आगे कहा, "सुशांत के मुद्दे को उसकी उम्र से ज्यादा खींचा जा चुका है। अब ज्यादातर लोग ऊबने लगे हैं। यह मुद्दा अब जितने दिन खींचा जाएगा, लोगों में बिहार के असली और जमीनी मुद्दों जैसे बाढ़, बेरोजगारी, पलायन, स्वास्थ्य सुविधाएं आदि के प्रति तड़प बढ़ती चली जाएगी। मुमकिन है यह मुद्दा बैक फायर कर जाए। यह बात जरूर है कि गांव-गांव तक यह मुद्दा पहुंच गया है और पॉलिटिकल डिबेट में शामिल हो गया है। लेकिन बिहार में सरकार के प्रति लोगों में नाराजगी है। भाजपा समर्थक भी नाराज हैं। हालांकि, लोगों के सामने दूसरा विकल्प नजर नहीं आ रहा है।"

भाजपा कंगना को मंच प्रदान नहीं करेगी

बिहार भाजपा के प्रदेश महामंत्री देवेश कुमार ने कहा, "कंगना आती हैं तो उनका स्वागत है। यह लोकतंत्र है, लेकिन भाजपा उन्हें मंच प्रदान नहीं करेगी। हमारी पार्टी का अपना सिस्टम है। हम उन्‍हें क्‍यों लाएंगे? हमारे प्रधानमंत्री और बड़े नेता हमारे स्‍टार प्रचारक हैं। बिहार की जनता का मूड पीएम मोदी और नीतीश कुमार की अगुवाई वाली सरकार चाहती है।

Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today

एक्सपर्ट का कहना है कि बिहार में मिडिल क्लास अभी भी चुनाव में निर्णायक नहीं है, जिन्हें कंगना या सुशांत से मतलब है।

https://ift.tt/32oH9WF