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जब अजय देवगन ने 'फूल और कांटे' में अक्षय को किया था रिप्लेस, सुपरस्टार ने खुद सुनाई थी पूरी कहानी

सुपरस्टार अक्षय कुमार और अजय देवगन ने एक ही साल में बतौर हीरो बॉलीवुड में डेब्यू किया था। वह साल था 1991। लीड एक्टर के तौर पर अक्षय की पहली फिल्म 'सौगंध' बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह फ्लॉप साबित हुई थी। वहीं, अजय देवगन को उनकी पहली फिल, 'फूल और कांटे' ने रातोंरात स्टार बना दिया था। लेकिन क्या आप जानते हैं कि 'फूल और कांटे' अजय से पहले अक्षय कुमार को ऑफर हुई थी?

खुद अक्षय ने किया था यह खुलासा

अक्षय और अजय रोहित शेट्टी की कॉप ड्रामा 'सूर्यवंशी' में स्क्रीन शेयर कर रहे हैं। इसी साल मार्च में फिल्म के ट्रेलर लॉन्च पर अक्षय ने बताया था 'फूल और कांटे' में अजय ने उन्हें रिप्लेस कर दिया था। अक्षय ने कहा था, "हम दोनों ने अपना कॅरियर साथ में शुरू किया था। ऐसा शुरू किया था कि एक ही फिल्म के लिए दोनों लड़े थे। इसकी पहली फिल्म 'फूल और कांटे' में पहले मैं था। फिर इसने मुझे धक्का मार दिया।"

ऐसी है रिप्लेस किए जाने की कहानी

अक्षय ने कुछ साल पहले एक इंटरव्यू में कहा था, "जी हां, मैं 'फूल और कांटे' में था। मैं सनी सुपर साउंड (रिकॉर्डिंग स्टूडियो) में नदीम-श्रवण के साथ म्यूजिक सेशन में बैठा था। उन दिनों हर गाने में 30-40 वायलिन बजने वाले होते थे। एक सेपरेट ऑर्केस्ट्रा। अब तो हम एक पल में सबकुछ खत्म कर देते हैं। रात को मैं पहले दिन के लिए शूट के लिए तैयार हो रहा था। और फिर मुझे एक कॉल आया कि भैया आप मत आना, कोई और आ रहा है।"

किस्सा यह भी: एक शाम को बदली थी जिंदगी

अक्षय कुमार फिल्म अभिनेता बनने से पहले मॉडल थे और उस शाम भी वे मॉडलिंग के एक सिलसिले में बैंगलोर (अब बेंगलुरु) जा रहे थे। तभी मेकअप मैन प्रमोद चक्रवर्ती की कंपनी ने उनसे पूछा कि क्या वे एक्टर बनना चाहता हैं? तब अक्षय ने उन्हें अपना पोर्टफोलियो दिखाया और तुरंत उन्हें तीन फिल्मों का ऑफर मिल गया।

अक्षय ने एक इंटरव्यू में कहा था, "मैं हैरान था। उन्होंने (प्रमोद चक्रवर्ती) मुझे तुरंत तीन फिल्मों के लिए साइन कर लिया। पहली फिल्म के लिए उन्होंने मुझे 5 हजार, दूसरी के लिए 50 हजार और तीसरी फिल्म के लिए 1.50 लाख रुपए का चैक दिया था। जिस वक्त उन्होंने मुझे ये चैक दिए, तब शाम के 6 बज रहे थे। अगर मैं बैंगलोर चला गया होता तो यह मेरे लिए किसी आपदा से कम नहीं होता। आज मैं कहीं एक रिटायर्ड मॉडल के रूप में होता। इसलिए जो होता है, अच्छे के लिए होता है।"

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अक्षय कुमार ने 'सौगंध' से डेब्यू करने से पहले महेश भट्ट की फिल्म 'आज' (1987) में छोटी सी भूमिका निभाई थी। (फोटो: अजय देवगन और अक्षय कुमार 'सूर्यवंशी' के ट्रेलर लॉन्च के दौरान। )

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UN summit to discuss post-pandemic global governance
The summit will debate “post-Covid-19 global governance in relation to the maintenance of international peace and security,” Niger’s UN Ambassador Abdou Abarry told journalists while presenting the Council’s program for the month.
Gun pulled at protest prompts county to institute curfew
A Florida county instituted a curfew Tuesday, several days after a man pulled a gun at a protest against police violence, officials said.
अयोध्या में आज पास हो जाएगा भव्य श्रीराम मंदिर का नक्शा, दिल्ली में सरकार बताएगी कि अनलॉक-4 में कैसे चलेगी मेट्रो

स्वागत है 2 सितंबर का... 2 के पहाड़े जैसा साल का 246वां दिन, बड़ा अहम है क्योंकि एक तरफ अयोध्या में बोर्ड की बैठक में राम मंदिर का नक्शा पास होगा, तो दूसरी तरफ कोर्ट बाबरी ढांचे के 32 आरोपियों का फैसला लिखना शुरू करेगी। मैदानों में पूर्वजों के तर्पण का पितृ पक्ष शुरू हो रहा है तो पहाड़ों पर चीन के साथ ठंडी सीमा फिर सुलग उठी है।

बहुत कुछ, बहुत तेजी से एक साथ घट रहा है, इसीलिए जरूरी है मॉर्निंग न्यूज़ ब्रीफ ताकि आप अवेयर भी रहें और अलर्ट भी, तो चलिए शुरू करते हैं -

आज इन 10 बड़े इवेंट्स पर रहेगी नजर -

आज से 16 दिन का श्राद्ध पक्ष शुरू हो रहा है जो 17 सितंबर तक चलेगा। 19 साल बाद ऐसा संयोग बना है कि दाे अश्विन अधिकमास हाेने से नवरात्र श्राद्ध के एक महीने बाद शुरू हाेंगे।

अयोध्या में आज प्रस्तावित राम मंदिर के निर्माण और पूरे परिसर के नक्शे को लेकर राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट बोर्ड की अहम बैठक होगी। इसमें नक्शा पास होगा और योजना बनेगी।

केंद्रीय शहरी मंत्री हरदीप सिंह पुरी आज दोपहर 3 बजे अनलॉक-4 में मेट्रो सेवाएं शुरू करने को लेकर विस्तृत SOP और गाइडलाइन जारी करेंगे।

चीन से बढ़ रहे तनाव के बीच रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह आज से रूस के दौरे पर जा रहे हैं। रक्षामंत्री वहां पर शंघाई सहयोग संगठन की अहम बैठक में हिस्सा लेंगे।

दिल्ली में जारी कई गतिविधियों पर प्रतिबंध का आज अंतिम दिन रहेगा। सरकार आगे का प्लान अनलॉक-4 के लिए जारी दिशा-निर्देश के हिसाब से करेगी।

इंजीनियरिंग एंट्रेंस एग्जाम JEE Main का दूसरा दिन है। आज बीई और बी.टेक के लिए पेपर होंगे। पहले दिन व्यवस्थाएं और पेपर का फीडबैक अच्छा रहा।

सुशांत सिंह राजपूत सुसाइड केस में सीबीआई आज 13वें दिन की जांच में फिर से रिया चक्रवर्ती के माता-पिता को पूछताछ के लिए बुला सकती है।

नेशनल टेस्टिंग एजेंसी ने 16 से 25 सितंबर के बीच होने वाली यूजीसी नेट के एग्जाम सेंटर बदलने के लिए शाम 5 बजे तक की आखिरी डेडलाइन दी है।

आज 10 दिन चलने वाले मशहूर ओणम पर्व का समापन होगा। मलयाली घरों में खूब सजावट होगी। मान्यता है कि आज राजा बली अपनी प्रजा से मिलने आते हैं।

फेसबुक पर भाजपा-कांग्रेस के पेजों को लेकर मची घमासान के बीच इसके इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर आज पार्लियामेंट्री स्टैंडिंग कमेटी के सामने पेश होंगे। कमेटी के अध्यक्ष शशि थरूर हैं।

कल की महत्वपूर्ण खबरें जो आप जानना चाहेंगे -

1. लद्दाख में बन रहे कारगिल युद्ध जैसे हालात

अब ऐसा लग रहा है कि चीन के साथ 15 जून वाली गलवान भिडंत से भी बड़ा कुछ हो सकता है, क्योंकि अब भारत पीछे नहीं हटेगा ....चीनी सेना की घुसपैठ के दो दिन बाद भारत ने लद्दाख सीमा को लेकर बड़ा खुलासा किया है। सेना के सूत्रों के मुताबिक, दक्षिणी पैंगॉन्ग के विवादित इलाके में पूरी तरह से भारत का कब्जा है और चीनियों को खदेड़ कर यहां की चोटियों पर अब हमारे जवान डटे हैं।

यहां पढ़ें और समझें कैसे डटी है सेना

2. प्रणब दा अनंत में लीन हुए

एक जन नेता की 60 वर्षों की अथक यात्रा मंगलवार को थम गई। पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी अनंत में विलीन हो गए... दिल्ली में बेटे अभिजीत मुखर्जी ने दादा की अंतिम क्रियाएं पूरी कीं। गमगीन देश से बेटे ने कहा, "पिता की मौजूदगी ही पूरे परिवार के लिए बड़ा सहारा था। उनके निधन की मुख्य वजह कोरोना नहीं, बल्कि ब्रेन सर्जरी रही।

पढ़ें कैसे विदा ली एक महान नेता ने

फाइल फोटो: रिया चक्रवर्ती और उनके पिता।

3. रिया के परिवार के पीछे सीबीआई

सुशांत सिंह राजपूत की मौत वाकई एक बड़ी केस स्टडी बनती जा रही है, हर दिन कुछ नया और सनसनीखेज... इस मामले में सीबीआई जांच का मंगलवार को 12वां दिन था। रिया की मां संध्या चक्रवर्ती और पिता इंद्रजीत से सीबीआई ने पहली बार पूछताछ की। दोनों से अलग-अलग करीब आठ घंटे पूछताछ में 15 सवाल पूछे गए।

और जानें क्या-क्या हुआ कल

4. जल्दी ही पटरी पर लौटेगी ट्रेन

कोरोना के डर के बीच ही सही ट्रेन के पहियों को और रफ्तार मिलेगी क्योंकि भारत में बिना ट्रेन सब कुछ ठहरा सा है... रेल मंत्रालय 100 स्पेशल ट्रेनें चलाने की तैयारी कर रहा है। रेलवे ने बताया कि इसके लिए राज्य सरकारों से सलाह ली जा रही है। कितनी ट्रेनें और चलाई जाएंगी, यह राज्यों की मांग पर निर्भर करेगा।

पढ़ें क्या है रेलवे की तैयारी

6 फीट की सोशल डिस्टेंसिंग, शाहरुख की सिग्नेचर स्टाइल में।

5. सोशल डिस्टेंसिंग रख ली तो बच जाएंगे 2 लाख लोग

ये स्टडी वाली खबर आपको जरूर पढ़ लेनी चाहिए क्योंकि इसमें सीधे-सीधे सलाह के साथ एक चेतावनी है.... भारत में मास्क का इस्तेमाल करके और सोशल डिस्टेंसिंग अपनाकर 1 दिसंबर तक कोरोना से होने वाली दो लाख मौतों को रोका जा सकता है। वहीं, अगर लॉकडाउन में ढील दी गई तो करीब 5 लाख लोगों की जान जा सकती है।

क्या है ये स्टडी, यहां जान लीजिए

यूएई वाली आईपीएल पर कोरोना का डर

क्रिकेट हम भारतीयों के दिलों में बसता है और इसीलिए बीसीसीआई ने कमर कस ली है कि कुछ भी हो आईपीएल तो होकर रहेगी.... बोर्ड 19 सितंबर से UAE में शुरू हो रही आईपीएल के दौरान 20,000 कोरोना टेस्ट कराएगा। इसके लिए 10 करोड़ रुपए खर्च होंगे। आईपीएल के दौरान हर 5वें दिन सभी खिलाड़ियों समेत स्टाफ का कोरोना टेस्ट होगा।

बीसीसीआई की फिक्र यहां समझ लीजिए

रूस की महिला के पेट से निकाला गया 4 फीट का सांप, उसी की तस्वीरें।

क्या मुंह में घुस सकता है 4 फीट का सांप ?

ये खबर हम आपको इसलिए पढ़ाना चाहते हैं कि मामला ही इतना अजीबोगरीब है.... रूस में एक महिला के पेट से डॉक्टरों ने चार फीट लंबा सांप निकाला और घटना का बकायदा वीडियो भी बनाया। महिला पेट में दर्द की शिकायत के साथ अस्पताल पहुंची थी। डॉक्टरों पहले तो समझ ही नहीं पाए कि महिला को क्या हुआ, लेकिन जांच के बाद उसका पेटदर्द सांप के रूप में पेट से निकला तो एक इंटरनेशनल खबर बन गई।

यहां है ये दिलचस्प खबर और इसका वीडियो जरूर देखिए

आखिर में, आज के लिए कल को भी जानना जरूरी है -

आज ही के दिन 1946 में संविधान सभा ने भारत की अंतरिम सरकार बनाई थी। इसने ही 15 अगस्त 1947 तक देश का कामकाज संभाला था।

53 साल पहले 2 सितंबर के दिन ही अमेरिका में पहली एटीएम मशीन चली थी। इस मौके पर बैंक ने विज्ञापन दिया था कि "2 सितंबर को हमारा बैंक 9 बजे खुलेगा और कभी बंद नहीं होगा।”

चलते-चलते, पहली एटीएम मशीन से जुड़ा मजेदार किस्सा जो एक पति की जिंदगी में समझदार पत्नी की अहमियत को बताता है -

तस्वीर में पहली ATM मशीन के साथ जॉन शेफर्ड बैरन।

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Ram Mandir Map approval and metro train SOP in unlock-4, JEE exam starts and sushant case CBI probe, corona social distancing and big news updates with Dainik Bhaskar Morning Briefing Today
US-India trade deal can be finalised before or soon after Presidential polls: Piyush...
Piyush Goyal hoped that the two countries can move to the next stage of larger engagement for a free trade agreement.
September 02, 2020 at 05:37PM
देश में सबसे ज्यादा दलित और मुसलमान कैदी यूपी में और आदिवासी मध्य प्रदेश की जेलों में बंद हैं, कॉमन जेलों में भीड़, लेकिन महिला जेलें खाली

नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) ने साल 2019 के लिए जेल संबंधित एक रिपोर्ट जारी की है। इसके मुताबिक, देशभर में करीब 4.72 लाख कैदी हैं। इनमें 4.53 लाख पुरुष और 19 हजार 81 महिला कैदी हैं। जिसमें 70 फीसदी तो अंडर ट्रायल हैं, 30 फीसदी ही दोषी हैं। सबसे ज्यादा उत्तर प्रदेश में एक लाख कैदी हैं। मध्य प्रदेश में 44 हजार 603 और बिहार में 39 हजार 814 कैदी हैं। 2019 में 18 लाख लोगों को कैद किया गया, जिसमें से 3 लाख लोगों को अभी भी जमानत नहीं मिल सकी है।

रिपोर्ट के मुताबिक, दलित, मुस्लिम और आदिवासी कैदियों की संख्या आबादी में उनके अनुपात से कहीं ज्यादा है। 2011 की जनगणना के आंकड़े बताते हैं कि देश में अनुसूचित जाति (एससी) की आबादी 16 फीसदी है, जबकि एनसीआरबी के आंकड़ों की मानें तो 21.7% दोषी दलित जेलों में बंद हैं।

अगर आदिवासियों की बात करें, तो दोषी कैदी 13.6% और 10.5% कैदी अंडर ट्रायल हैं। जबकि, इनकी कुल आबादी देश में 8.6% है। ओबीसी से ताल्लुक रखने वाले 34.9% दोषी जेलों में कैद हैं, जबकि इनकी आबादी 40% के आसपास है। जबकि, बाकी दूसरी जातियों का आंकड़ा 29.6% है।

मुस्लिम वर्ग की बात करें तो 16.6 फीसदी दोषी कैदी जेलों में बंद हैं और 18.7 फीसदी अंडर ट्रायल हैं। जबकि, देश में इनकी आबादी 14.2 फीसदी है। वहीं हिंदुओं की बात करें तो करीब 74 फीसदी दोषी जेलों में कैद हैं।

सोशल एक्टिविस्ट और आईआईएम अहमदाबाद की एसोसिएट प्रोफेसर रितिका खेड़ा कहती हैं कि जेलों में दलित, आदिवासी और मुसलमानों की संख्या ज्यादा होने से हम यह नहीं कह सकते कि इन समुदायों में क्राइम ज्यादा है। बल्कि, इससे यह जान पड़ता है कि देश में "रूल आफ लॉ" काफी कमजोर है।

रीतिका के मुताबिक, अंडर ट्रायल में इनकी संख्या ज्यादा इसलिए भी है कि इनके पास जमानत करवाने के लिए वकील नहीं है या पैसा नहीं है। उनकी गरीबी उन्हें जेल में रखती है। जबकि, ऊंची जाति और वर्ग के लोग, दोषी पाए जाने पर भी आसानी से जमानत ले लेते हैं। हाल ही में विकास दुबे, जिसका एनकाउंटर हो गया और जेसिका लाल के हत्यारे, मनु शर्मा को भी रिहा कर दिया गया।

वो कहती हैं कि कई बार आदिवासियों और मुसलमानों को झूठे केसों में भी फसाया जाता है। जैसे कि छत्तीसगढ़ में सोनी सॉरी को गिरफ्तार किया गया और उनके साथ जेल में बदसलूकी की गई। इस तरह के और भी कई उदाहरण हैं।

देश में सबसे ज्यादा दलित कैदी यूपी में हैं। इसके बाद मध्य प्रदेश और पंजाब के जेलों में बंद हैं। वहीं, सबसे ज्यादा आदिवासी कैदी मध्य प्रदेश में हैं और सबसे ज्यादा मुसलमान यूपी की जेलों में बंद हैं।

पांच साल पहले यानी 2015 की बात करें तो उस समय भी दलित और आदिवासी दोषी कैदियों की संख्या लगभग इतनी ही थी। 2015 में 21% दोषी दलित, 13.7% दोषी आदिवासी और 15.8% दोषी मुसलमान जेल में थे। रिपोर्ट के मुताबिक, एससी/एसटी एक्ट के तहत 2019 देशभर में 628 लोग जेल में हैं। सबसे ज्यादा यूपी में 141, मध्यप्रदेश में 111और बिहार में 79 लोग जेल में हैं।

18.3 फीसदी कैदी ही महिला जेलों में हैं

देश में कुल 19 हजार 81 महिला कैदी हैं, इनमें से सिर्फ 18.3 फीसदी यानी 3 हजार 652 ही महिलाओं के लिए बने जेलों में कैद हैं। जबकि, 16 हजार 261 महिलाएं देश की दूसरे जेलों में कैद हैं। देश में कुल महिला जेलों (वुमन जेल) की संख्या 31 है। राजस्थान में सबसे ज्यादा 7 महिला जेल हैं।

2014 से 2019 के बीच महिलाओं के लिए बने जेलों की क्षमता 34.6% बढ़ी है, लेकिन इस दौरान कैदियों की संख्या सिर्फ 21.7% ही बढ़ी है। 2014 में महिलाओं के लिए बने जेलों में 62% महिलाएं कैद थीं, जबकि 2019 में आंकड़ा घटकर 56.1% हो गया।

उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ ये चार ऐसे राज्य हैं, जहां गैर-महिला जेलों में महिला कैदियों की संख्या क्षमता से ज्यादा है। लेकिन, राजस्थान में 7 महिला जेल होने के बाद भी तीन हिस्सा खाली ही है। यही स्थिति तमिलनाडु (5 महिला जेल) और बाकी राज्यों की भी है।

महिला जेल खाली और कॉमन जेलों में ओवरक्राउडिंग क्यों?

अब सवाल उठता है कि महिला जेलों में महिलाओं की संख्या कम क्यों है? जबकि गैर-महिला जेलों में जरूरत से ज्यादा भीड़ है। इस बारे में ओवरक्राउडिंग और जेलों में कैदियों की बढ़ती संख्या को लेकर जेल सुधारक के रूप में काम करने वालीं और तिनका- तिनका की संस्थापक वर्तिका नंदा कहती हैं कि देश में कई राज्यों में महिला जेल नहीं हैं। ऐसे में अगर वहां अपराध दर्ज किया जाता है, तो कैदी वही रखे जाते हैं इसलिए महिला जेलों में इनकी संख्या कम है और कॉमन जेलों में ज्यादा। दूसरी वजह है कि देश में महिला अपराधियों की संख्या बढ़ रही है, लेकिन उसके मुकाबले महिला जेलों के बढ़ने की रफ्तार धीमी है। इतना ही नहीं उन जेलों में महिला स्टाफ की भी कमी है।

वर्तिका कहती हैं कि एक और सबसे बड़ी वजह ये है कि देश में जहां महिला जेलों की संख्या ज्यादा होनी चाहिए, वहां कम है। कई जेल ऐसी भी हैं, जो बहुत दूर हैं, वहां कनेक्टिविटी नहीं है। इसलिए हमें जेल बनाते समय यह ध्यान रखने की जरूरत है कि वह किस जगह पर हो, कहां अपराध ज्यादा हैं, कहां बेहतर कनेक्टिविटी है। सही जगह पर जेल नहीं होने की वजह से ही देश के कई महिला जेलों में कैदियों की संख्या काफी कम है।

एक साल में 3.32 फीसदी बढ़े कैदी

इतना ही नहीं, जेलों में भीड़ भी बढ़ी है, यानी क्षमता से अधिक कैदी बढ़े हैं। 2015 में 100 लोगों के रहने की जगह पर 114 कैदी थे, जबकि 2019 में आंकड़ा 118 हो गया। दिल्ली में यह आंकड़ा 175 है। अगर विदेशी कैदियों की बात करें तो भारत में कुल 5 हजार 608 विदेशी कैदी जेल में हैं। इनमें 4,776 पुरुष और 832 महिला हैं। इसमें से 2,171 दोषी हैं और 2,979 अंडर ट्रायल हैं जबकि 40 बंदी हैं। 2018 के मुकाबले देश में कैदियों की संख्या 3.32 फीसदी बढ़ी है।

वर्तिका का कहना है कि हमारे देश में केसों का निपटरा वक्त पर नहीं होता है, अंडर ट्रायल का मामला जल्द नहीं सुलझता है। कई ऐसे लोग होते हैं, जिनके अपराध की सजा 2 महीने या 6 महीने होनी चाहिए थी, लेकिन उनका लंबा समय जेल में गुजर जाता है। चिंता की बात तो ये है कि इसके लिए कोई जिम्मेदार ही नहीं होता। इसके साथ ही कई लोग ऐसे होते हैं, जो हैबिचुअल ऑफेंडर होते हैं, वो बार- बार अपराध करते हैं और जेल में आते हैं। इससे भी कैदियों की संख्या बढ़ती है।

सबसे ज्यादा गुजरात के जेलों से फरार हुए कैदी

देशभर के जेलों से 2019 में कुल 468 कैदी फरार हुए, जिसमें से 329 ज्यूडिशियल कस्टडी से और 139 पुलिस कस्टडी से फरार हुए। इनमें से 231 को फिर से गिरफ्तार कर लिया गया। गुजरात से सबसे ज्यादा 175 कैदी फरार हुए। हालांकि, सिक्किम, मेघालय, गोवा और जम्मू कश्मीर सहित 11 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से एक भी कैदी फरार नहीं हुए हैं।

2019 में 116 कैदियों ने सुसाइड किया

2019 में जेल में कुल 1 हजार 775 कैदियों की मौत हुई है। इनमें से 1,544 की प्राकृतिक, 165 की अप्राकृतिक और 66 की मौत के कारण पता नहीं चल पाया। रिपोर्ट के मुताबिक, जिन लोगों की प्राकृतिक मौत हुई है, उनमें 1,466 कैदी बीमार थे, 78 कैदियों की मौत ज्यादा उम्र की वजह से भी हुई है। अप्राकृतिक मौत में सबसे ज्यादा मामला सुसाइड का है। 2019 में 116 कैदियों ने सुसाइड किया है। उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा कैदियों की मौत हुई है।

वर्तिका नंदा कहती हैं कि ये एक सोशियोलजिकल और लीगल इश्यू है, जिसपर कलेक्टिवली ध्यान नहीं दिया जा रहा है। जब से जेल बनी हैं, तब से इस तरह की घटनाएं हो रही हैं, एक तरह से ये जेलों के स्वभाव का हिस्सा हो गया है, जो ठीक नहीं है। जेल चाहती है कि जो यहां आए, वो जिंदा रहे, लेकिन कैसे जिंदा रहे इस पर ध्यान नहीं दिया जाता है। कई लोग ऐसे हैं, जिन्होंने अपराध नहीं किया था या उनका ट्रायल जल्दी हो जाना चाहिए था, लेकिन उन्हें लम्बा वक्त जेल में गुजरना पड़ता है। इससे भी वे डिप्रेशन में आ जाते हैं और ऐसे कदम उठाते हैं। इसलिए ये जरूरी है कि जेल सुधार को लेकर काम किया जाए, सुविधाएं दी जाएं, लाइब्रेरी की व्यवस्था की जाए।

2019 में कुल 121 कैदियों को मौत की सजा दी गई। इनमें यूपी में 27, मध्य प्रदेश में 17 और कर्नाटक में 14 कैदियों को मौत की सजा दी गई। जबकि, 77 हजार 158 को आजीवन कारावास की सजा और 20 हजार 763 को 10 साल से ज्यादा की सजा दी गई।

रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में 7 कैदी पर एक जेल स्टाफ है। सबसे ज्यादा झारखंड में 19 कैदी पर एक स्टाफ है। वहीं यूपी में 17, असम में 11, छत्तीसगढ़ में 10, बिहार में 8, मणिपुर-अरुणाचल में 1-1 कैदी पर एक स्टाफ है।

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Indian jails remained overcrowded, Higher share of Dalits, tribals, Muslims in prison than numbers outside
17 साल उम्र थी, गर्मियों वाली टीशर्ट और हाफ पैंट में लद्दाख के लिए निकल गया, जोजिला तक पहुंचे तो जूते फट चुके थे, मजदूरों के टेंट में रात गुजारी

पिछले तीन महीनों में देश में सबसे ज्यादा चर्चा लद्दाख की हुई है। दिल्ली से लद्दाख की दूरी 1 हजार किमी से ज्यादा है। आमतौर पर बाइक पर लद्दाख जाने वाले बहुतेरे हैं। कइयों ने मनाली से श्रीनगर का सफर साइकिल पर भी किया है। लेकिन, पैदल शायद किसी ने नहीं।

ये कहानी है दिल्ली के अशोक उप्पल की, जो एक नहीं, बल्कि 2 बार पैदल लद्दाख जा चुके हैं। उनकी कहानी उन्हीं की जुबानी...

15 से 25 की उम्र, वो उम्र जब दिल में आता है, कुछ भी कर जाओ। 1986 की बात है। कांवड़ यात्रा के लिए मैं पहली बार 200 किमी पैदल चलकर दिल्ली से हरिद्वार गया था। ये पैदल पहली यात्रा थी। इसके बाद वैष्णोदेवी गया। वैष्णोदेवी में बर्फ देखकर हम दोस्त चिल्लाने लगे तो वहां लोगों ने बोला ये क्या कोई बर्फ है? बर्फ ही देखना है तो लद्दाख जाओ। वहां बर्फ से रास्ते बंद रहते हैं।

दिल्ली के रहने वाले अशोक उप्पल दो बार पैदल लद्दाख जा चुके हैं। जब वे 17 साल के थे तब से ही यात्रा कर रहे हैं।

हमने तय किया, 1987 में कोशिश करेंगे पैदल लद्दाख जाने की। मई में छुटि्टयां थी तो गर्मियों के कपड़े, टीशर्ट और शॉर्ट्स में ही हम तीन दोस्त लद्दाख के लिए निकल गए... पैदल। जम्मू से श्रीनगर तक तो ज्यादा दिक्कत नहीं आई। हम एक रात श्रीनगर में रुके और जब अगली रात सोनमर्ग पहुंचे तो ठंड लगने लगी। हमारे पास कपड़े वही गर्मियों वाले थे। हम चलते-चलते जोजिला पहुंचे तो हमारे जूते फट चुके थे। कीचड़ में पैर धंसे तो जूतों के सोल वहीं रह गए और पैर बाहर आ गए। वहां से हमने नंगे पैर चलना शुरू किया। जैसे-तैसे द्रास तक पहुंचे।

जब जोजिला से नीचे उतरे तो सड़क बनाने वाले मजदूरों के कैम्प में रुकना पड़ा

दिल्ली से अमरनाथ तक 7 बार पैदल जा चुका हूं। हम दिल्ली से जम्मू 10 दिन में पैदल पहुंच जाते थे। फिर अगले 7-8 दिन में जम्मू से श्रीनगर। फिर श्रीनगर से करगिल तक 10 दिन में पहुंचा था। पहली बार जब पैदल लद्दाख के लिए निकला, तो करगिल तक जा पाया था, उसमें 28 दिन लग गए थे। हम जब दिल्ली से जम्मू गए तो रास्ते में ढाबे, धर्मशाला, गेस्ट हाउस में रुक जाते थे। जम्मू से श्रीनगर के बीच भी ये सब ठिकाने मिल ही जाते थे।

अशोक दिल्ली से अमरनाथ तक 7 बार पैदल जा चुके हैं। वे 23 बार कश्मीर की यात्रा कर चुके हैं।

लेकिन, जब श्रीनगर से लेह के लिए निकले तो एक रात दिक्कत आई। सोनमर्ग से जोजिला की चढ़ाई की और जब नीचे उतरे तो सड़क बनाने वाले मजदूरों के कैम्प में रुकना पड़ा था। रात बड़ी मुश्किल में काटी। पैर गल चुके थे, छाले थे, भयानक ठंड थी और पैरों में स्लीपर भी नहीं थी। तबीयत खराब होने लगी। करगिल तक पहुंच गए थे। वहां ठहरने के लिए एक गेस्ट हाउस भी मिल गया।

हम ये कोशिश करते थे कि सुबह 4 बजे चलना शुरू कर दें और शाम होते-होते किसी गांव या कस्बे तक जरूर पहुंच जाएं। जब शाम होने लगती तो देख लेते कि कितनी दूरी पर अगला गांव है। हमारा रुकना, खाना और ये पूरी यात्रा बहुत सस्ती होती थी। 28 दिन की दिल्ली से लद्दाख की यात्रा हम तीन लोगों ने 15 हजार रुपए में पूरी कर ली थी।

उम्र तब 17 साल थी, जब पहली बार पैदल लद्दाख गया। अब 50 प्लस हो चुका हूं। मन को जो अच्छा लगा, वो करने लगा। तब फेसबुक, इंस्टा का जमाना नहीं था। 2011 में फेसबुक पर आया और 80 से ज्यादा ट्रैवलिंग ग्रुप का हिस्सा बन गया। लेकिन, भीड़ से दूर भागता हूं, इसलिए सुनसान इलाकों में अकेले ट्रैवल करता हूं।

अशोक बताते हैं कि उन्होंने ज्यादातर धार्मिक यात्राएं की हैं। वे 1986 से 2000 तक धार्मिक यात्रा पर गए। उसके बाद 2000 से 2004 तक सोलो ट्रेवल किया।

दिल्ली के कालका जी मार्केट में फुटवेयर का शोरूम है। फैमिली में पत्नी है, बेटी मास्टर्स कर रही है, बेटे ने 12वीं किया है। दोस्तों के साथ या फिर अकेले बाइक पर एडवेंचर ट्रिप पर जाता हूं और फैमिली के साथ लग्जरी ट्रिप पर। बेटा बोलता भी है कि लाइसेंस बनवा दो, मैं भी आपके साथ बाइक पर लद्दाख जाऊंगा।

मैंने ज्यादातर धार्मिक यात्राएं की हैं। 1986 से 2000 तक धार्मिक यात्राओं पर ही जाते रहे, क्योंकि ग्रुप ही ऐसा था। जो दो दोस्त इन यात्राओं पर साथ जाते थे, उन्होंने एक बार ऐसी ही एक ट्रिप पर गलतफहमी के चलते मार-पीट की और मुझे खाई में फेंक दिया। किस्मत अच्छी थी इसलिए जिंदा बच गया। वापस आकर उन दोस्तों पर केस किया था, फिर समझौते हो गए। पिछले 20 साल से उनसे कोई संपर्क नहीं। अब उस घटना को याद नहीं करना चाहता। इस हादसे के चलते 2000 से 2004 तक चार साल सोलो ट्रैवल किया। इसका मेरे दिमाग पर गहरा असर हुआ, मैं लोगों से बात ही नहीं करता था, दोस्त बनाना भी बंद कर दिया।

2011 में फेसबुक पर आया। 2012 से फिर बाइकिंग शुरू की। समय बीता तो दोस्त बनाना भी शुरू किया। लोगों से मिलने लगा। बात करने लगा। लेकिन, अब पैदल यात्राएं बंद हैं। 2017 में आखिरी बार गोरखपुर से मस्तांग पैदल गया था, 515 किमी अकेले। ये यात्रा 11 दिन में पूरी हुई थी। 28 साल पहले केदारनाथ में एक बाबा ने कहा था कि मस्तांग की यात्रा जरूर करना। वहां विष्णु जी का मंदिर है, इसलिए मैंने उसे पूरा किया। इसके लिए गोरखपुर तक ट्रेन से गया और आगे पैदल।

अशोक कहते हैं कि 2017 में आखिरी बार गोरखपुर से मस्तांग पैदल गया था, 515 किमी अकेले। ये यात्रा 11 दिन में पूरी हुई थी।

बाइक से यात्राएं तो 1987 से कर रहा हूं, लेकिन प्रोफेशनल राइडिंग पिछले 7-8 सालों से ही शुरू की है। बाइक से ही तीन बार लद्दाख, एक बार स्पीति, हिमाचल, उत्तराखंड, राजस्थान और गुजरात को नापा है। अब बस नॉर्थ ईस्ट जाना चाहता हूं, लेकिन वहां की यात्रा एक हफ्ते में पूरी नहीं होती और बिजनेस एक हफ्ते से ज्यादा छुट्‌टी नहीं लेने देता।

ट्रैवल पैशन है। 2 महीने हो जाएं, कहीं न जाऊं तो परेशान हो जाता हूं। फिर चाहे बाइक हो या फैमिली के साथ फ्लाइट से। लगता है कि लोगों से मिलूं, लोकल खाना और जगह देख सकूं। ट्रैवल की बदौलत ही हमेशा खुश रहता हूं, काम कम हो, बिजनेस में नुकसान हो। भले फैमिली वालों ने ज्यादा पैसे कमा लिए, वो नोट गिनते रहते हैं, सगे भाई कई गुना आगे हैं, लेकिन मुझे बुरा नहीं लगा। क्योंकि, ये पैसा यहीं रह जाना है। मेरी फैमिली कभी ये शिकायत नहीं करती कि आप हमें घुमाते नहीं। जो कमाएगा वो खर्च नहीं करेगा, लोग सिर्फ कमाकर जोड़ रहे हैं। मैं एक्सपीरिएंस कमा रहा हूं।

एक और बात, मैं टूर के लिए एजेंट से पैकेज कभी नहीं लेता। 25 साल शादी के हुए थे तो कुछ साल पहले कश्मीर का पैकेज लिया था। कभी प्लान भी नहीं करता, बस निकल पड़ता हूं। जहां मन किया वहां रुक गया। फैमिली को भी साल में दो ट्रिप करवाता ही हूं और 1-2 मेरे सोलो ट्रिप। यानी हर 2-3 महीने में एक ट्रिप। कभी दोस्त, कभी फैमिली, कभी सोलो।

जब पैदल चलता था तब भी और अभी भी। हमेशा से फिटनेस फ्रीक रहा हूं। डेली वर्कआउट करता हूं, डेढ़ घंटा। 30-40 मिनट वॉक, 40-45 मिनट एक्सरसाइज करता हूं। खाने-पीने का चटोरा हूं तो बहुत खाता हूं। ऑनलाइन खाने और ट्रैवल वीडियो ही देखता रहता हूं।

अशोक कहते हैं कि बाइक से यात्राएं तो 1987 से कर रहा हूं, लेकिन प्रोफेशनल राइडिंग पिछले 7-8 सालों से ही शुरू की है।

4 सबसे खतरनाक हादसे, कश्मीर में ब्लास्ट हुआ, पंजाब में उग्रवादियों ने पकड़ा...

1. कश्मीर : जहां सामने ब्लास्ट हुआ शर्ट जल गया

23 बार तो मैं कश्मीर ही जा चुका हूं। 1988 के बाद 7 साल कश्मीर नहीं गया। 1988 में जब मैं श्रीनगर में था तो मेरे सामने ब्लास्ट हुआ, मेरी शर्ट में आग लग गई। मरते- मरते बचा मैं। तब वहां जाने से ही डर गया था। लेकिन, 1995 से फिर जाने लगा। वैसे ये मेरा सबसे खतरनाक ट्रिप था।

2. पंजाब : मनाली जा रहे थे, उग्रवादियों ने पकड़ लिया

एक और ट्रिप शायद इतना ही खतरनाक था। हम मनाली से लेह जा रहे थे। 1988 की बात है। पंजाब में आतंकवाद था, अंबाला क्रॉस किया तो सामने उग्रवादी खड़े थे, रोक लिया और बैठा लिया। पूछने लगे - कहां जा रहे हो? हमने कहा हरमिंदर साहब दर्शन करने जा रहे हैं। तब हम बस 18 साल के थे। बच्चे हैं, धार्मिक हैं ये सोचकर शायद उन्होंने हमें जाने दिया।

3. गंगोत्री : ग्लेशियर में रास्ता भटक गए, तीन दिन बर्फ पिघलाकर पानी पिया

1989 में गंगोत्री से गोमुख जाना था। दुकानदार कहने लगा कि आप तपोवन भी होकर आना, वहां साधु-संत तपस्या कर रहे हैं और गुफा है। शायद हिप्नोटाइज हो गए हैं, वो कहने लगा शेर और चीते घूमते हैं, समाधियां हैं, आत्माएं तपस्या करती हैं। हम जाने लगे तो सोचा गाइड करते हैं। लेकिन, तब विदेशी ही गाइड करते थे, इसलिए हम खुद निकल गए। शाम को 4 बजे तपोवन से निकले तो रास्ता भटक गए, पूरी रात ग्लेशियर पर बैठकर बिताई।

अशोक का दिल्ली के कालका जी मार्केट में फुटवेयर का शोरूम है। फैमिली में पत्नी है, बेटी मास्टर्स कर रही है, बेटे ने 12वीं की है।

एक चादर में चिपक कर सोए तीन दोस्त। हमेशा ड्रायफ्रूट बिस्कुट लेकर चलते थे, वही खाए। सुबह बरसात होने लगी, पूरे दिन रास्ता नहीं मिला। बर्फ चूसकर पानी पिया, उससे गले में जख्म हो गए। दूसरी रात भी चट्‌टान पर लेटकर बिताई। तीसरे दिन हम लाश ही होने वाले थे। तबीयत बिगड़ गई थी, चील और कौए नजर आने लगे थे। थोड़ी धूप निकली तो हमने हिम्मत जुटाई। फिर एक बकरी चराने वाला हमें 3 घंटे चलाकर लाया।

4. अमरनाथ : जब बर्फीले तूफान में फंस गए, टेंट और बिस्तर सब पानी में बह गए

1995 में अमरनाथ में ट्रैजेडी में फंस गया था। बारिश हो रही थी, पंचतरणी में। पहाड़ी से पानी टेंट में बहकर आने लगा। सामान, कंबल और बिस्तर गीले हो गए। अगले दिन सुबह 9 बजे तक बरसात नहीं रुकी। सोचने लगे चलो वापस चलते हैं, अगले साल ट्राय करेंगे। बात कर ही रहे थे कि बर्फबारी शुरू हो गई। आधा किमी चले ही थे कि बर्फीला तूफान आया। घोड़े वाले भाग गए, लंगर बंद हो गए, 200 लोग एक-दूसरे को पकड़कर खड़े थे। घुटन में मरने वाले थे। हम चल दिए, लेकिन जो लोग वहां बैठे थे, उनकी वहीं मौत हो गई। लोगों की लाशें गिर रहीं थीं। मेरे एक ही पैर में जूता था। और तीन बैग उठा रखे थे। बिना रुके चलता रहा। बमुश्किल जान बची।

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