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देश | दैनिक भास्कर
चंडीगढ़ में रह रहे अफगानी छात्रों का दर्द:बोले- वीजा हो रहा खत्म खाने के लिए भी नहीं बचे पैसे, मकान मालिक भी बना रहे दबाव, घर वाले बोलते हैं हालात खराब है यहां मत आओ
चंडीगढ़ में रह रहे अफगानी छात्रों का दर्द:बोले- वीजा हो रहा खत्म खाने के लिए भी नहीं बचे पैसे, मकान मालिक भी बना रहे दबाव, घर वाले बोलते हैं हालात खराब है यहां मत आओ
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सफलता के लिए सिर्फ फिट रहना और बेहतर आईक्यू लेवल काफी नहीं, एक्सपर्ट से जानिए उन गलतियों के बारे में, जो कैंडिडेट्स को SSB से बाहर कराती हैं UPSC ने 6 सितंबर को आयोजित हुई नेशनल डिफेंस एकेडमी ( NDA) और नवल एकेडमी की परीक्षा का रिजल्ट जारी कर दिया है। सिलेक्ट होने वाले कैंडिडेट्स को अब इस भर्ती प्रक्रिया की सबसे ज्यादा चैलेंजिंग स्टेज से गुजरना होगा। जिसका नाम है एसएसबी इंटरव्यू। इस स्टेज में फिजिकल टेस्ट के साथ मेंटल एबिलिटी से जुड़े विभिन्न टेस्ट, ग्रुप डिस्कशन और इंटरव्यू भी शामिल होता है। आमतौर पर यही समझा जाता है कि एसएसबी क्लियर करने के लिए बेहतर आईक्यू लेवल और कैंडिडेट का फिट रहना सबसे ज्यादा जरूरी है। ये पूरी तरह सही नहीं है। सिलेक्शन बोर्ड में रह चुके सदस्यों की मानें तो फिटनेस और आईक्यू लेवल के अलावा ऐसे कई फैक्टर हैं, जो एसएसबी से कैंडिडेट्स को बाहर कराते हैं। और अधिकतर कैंडिडेट्स को इनके बारे में पता ही नहीं होता। क्या है SSB? भारतीय जल, थल और वायु सेना में अधिकारियों के पद पर भर्ती के लिए यूपीएससी द्वारा NDA, CDS और AFCAT परीक्षा आयोजित की जाती हैं। NDA परीक्षा में 11वीं पास कैंडिडेट्स आवेदन कर सकते हैं। वहीं CDS और AFCAT परीक्षा ग्रेजुएट कैंडिडेट्स के लिए होती है। तीनों परीक्षाओं में सिलेक्शन की प्रक्रिया एक ही है। लिखित परीक्षा पास करने के बाद कैंडिडेट्स को एसएसबी इंटरव्यू क्लियर करना होता है। सर्विस सिलेक्शन बोर्ड ( SSB) ही तय करता है कि भविष्य में आप भारतीय सेना की अलग-अलग विंग्स में से किसी एक में ऑफिसर बनने के काबिल हैं या नहीं। इसी बोर्ड के पूर्व सदस्य कर्नल अशोकन के मुताबिक, हर छह महीने में होने वाली NDA परीक्षा के लिए लगभग 3 लाख और सीडीएस के लिए 5 लाख कैंडिडेट्स आवेदन करते हैं। आवेदन करने वाले छात्रों में से 3-4 प्रतिशत डिफेंस करियर में अपनी मंजिल तक पहुंच पाते हैं। अगर आपने भी एनडीए की लिखित परीक्षा पास की है, या फिर इस परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं तो एसएसबी के उन स्टेप्स के बारे में आपको पता होगा, जहां से सफलता का रास्ता गुजरता है। लेकिन, क्या आप यह जानते हैं कि एसएसबी पैनल किन खूबियों के आधार पर आपका चयन करता है? इस सवाल का जवाब भी वही ऑफिसर दे सकते हैं जो कैंडिडेट्स को सिलेक्ट या रिजेक्ट करते हैं। दैनिक भास्कर ने ऐसे ही कुछ ऑफिसर्स से बात की है। बोर्ड का हिस्सा रह चुके कर्नल अशोकन, कर्नल डीजेएस चहल और कर्नल कुलवंत कटारिया आपको बता रहे हैं उन फैक्टर के बारे में, जिनके आधार पर कैंडिडेट सिलेक्ट या रिजेक्ट होते हैं। 30% तक कैंडिडेट होते हैं पहले चरण में सिलेक्ट एसएसबी के पहले चरण में तीन टेस्ट होते हैं। पहला और दूसरा है ऑफिसर इंटेलिजेंस, पिक्चर परसेप्शन एंड डिस्क्रिप्शन टेस्ट। तीसरा टेस्ट क्वांटिटेटिव एप्टीट्यूट, वर्बल एंड नॉन वर्बल रीजनिंग पर आधारित होता है। इस तरह पहली स्टेज में आपका इंटेलिजेंस लेवल और मानसिक स्थिति परख ली जाती है। अगर आप मानसिक रूप से तैयार नहीं है और सेना में जाने के लिए पर्याप्त इंटेलिजेंस लेवल नहीं रखते, तो आप इस स्टेज को क्वालिफाई नहीं कर सकते। यही वजह है कि पहले चरण में 10-30 प्रतिशत कैंडिडेट्स ही सिलेक्ट होते हैं। सिर्फ टास्क पूरा करने पर जोर लगाएंगे, तो रिजेक्ट हो सकते हैं सामान्य सवालों का जटिल जवाब देने वाले कई कैंडिडेट्स को रिजेक्शन का सामना करना पड़ता है। इसका कारण बताते हुए कर्नल डीजेएस चहल कहते हैं, आमतौर पर एसएसबी को एक ऐसे टेस्ट के रूप में देखा जाता है जहां टास्क को पूरा कर सिलेक्शन की संभावनाएं बढ़ जाती हैं। जबकि ये आधा सच है। टास्क सिर्फ आपकी स्किल्स को परखने का एक जरिया होता है। टास्क के जरिए किन स्किल्स को परखा जा रहा है, यह समझकर उन स्किल्स को डेवलप करने की कोशिश करें, न की हर हाल में टास्क पूरा करने पर जोर लगाएं। सिर्फ बोलना नहीं, सुनना भी कम्युनिकेशन स्किल है ग्रुप डिस्कशन एसएसबी का अहम हिस्सा है। यहां कैंडिडेट को अपनी नॉलेज और कम्युनिकेशन स्किल प्रूव करनी होती है। एसएसबी के पैमानों के अनुसार, बोलने के साथ सुनना और ऑब्जर्व करना भी कम्युनिकेशन स्किल का ही हिस्सा है। ग्रुप टास्क या ग्रुप डिस्कशन में यह ऑब्जर्व किया जाता है कि आप टीम के अन्य सदस्यों की राय को कितना महत्व दे रहे हैं। इसके आधार पर ही आपको एक अच्छा कम्युनिकेटर माना जाएगा। दूसरों को सुनने की क्षमता न होने की वजह से आप रिजेक्ट हो सकते हैं। जिस फील्ड में इंट्रेस्ट है, वहां परफेक्शन हासिल करना जरूरी SSB की तैयारी कर रहे स्टूडेंट्स के सामने सबसे बड़ा सवाल होता है कि वह कहां से शुरुआत कर सकते हैं। अक्सर स्टूडेंट्स को स्पोर्ट्स में हिस्सा लेने, डिबेट की प्रैक्टिस करने जैसी सलाहें दी जाती हैं। जिनसे वे एसएसबी में बेहतर परफॉर्म कर पाएं। इस पर कर्नल कुलवंत कटारिया कहते हैं: बेसिक कम्युनिकेशन स्किल्स और फिजिकल फिटनेस के साथ स्टूडेंट्स वही फील्ड चुनें जिसमें उनका इंट्रेस्ट है। जहां आपकी रुचि हो वहां परफेक्शन हासिल करना ही एसएसबी के लिए परफेक्ट होना है। वह स्पोर्ट भी हो सकता है, डिबेट भी, म्यूजिक भी। अंत में इस तरह होता है सिलेक्शन का फैसला साइकोलॉजिकल टेस्ट, फिजिकल टेस्ट और इंटरव्यू की जिम्मेदारी तीन एक्सेसर्स पर होती है। अंतिम दिन तीनों एक्सेसर्स के बीच कैंडिडेट्स के सिलेक्शन को लेकर डिस्कशन होता है। एक्सपर्ट्स के अनुसार अधिकतम मामलों में सिलेक्ट होने वाले कैंडिडेट का तीनों टेस्ट में बेहतर प्रदर्शन रहता है। कई बार मामूली अंतर होता है, ऐसी परिस्थिति में यह देखना होता है कि कैंडिडेट की किस स्किल में कमी है। साहस, तर्क शक्ति और ऑफिसर इंटेलिजेंस ऐसी स्किल्स हैं जिनमें 100 प्रतिशत परफेक्ट होना जरूरी होता है। SSB के बाद क्या? लिखित परीक्षा पास करने के बाद कैंडिडेट्स एसएसबी इंटरव्यू के लिए क्वालिफाई करते हैं। लेकिन एसएसबी ही अंतिम सिलेक्शन नहीं होता। इसके बाद आपका मेडिकल टेस्ट होता है। इसे मेडिकल बोर्ड कहा जाता है। मिलिट्री हॉस्पिटल इसके परिणाम घोषित करने में 6 से 10 दिन का समय लेता है। जितना समय मेडिकल बोर्ड में लगता है, उस दौरान कैंडिडेट्स को सिलेक्शन सेंटर में ही रुकना होता है। एसएसबी टिप्स पर आधारित इस खास सीरीज की अगली स्टोरी में जानिए, स्लम एरिया में रहने वाले एक ऐसे कैंडिडेट्स के सफल होने की कहानी, जिसके लिए न्यूट्रीशन लेना और फिटनेस तो दूर अपना पेट भरना ही एक चुनौती थी। Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today SSB 2020 : Learn about those tricks and mistakes related to SSB interview, which can break or make your dream of becoming an officer in the army
October 10, 2020
जब राजीव गांधी की हत्या के बाद पूछा गया था- क्या आप सोनिया को सहारा देने फिर से राजनीति में आ रहे हैं? अमिताभ बच्चन 78 साल के हो गए हैं। 11 अक्टूबर 1942 को इलाहाबाद, उत्तर प्रदेश में जन्मे अमिताभ 51 साल से बॉलीवुड में एक्टिव हैं। हालांकि, इस अवधि में तीन साल के लिए वे राजनीति में भी चले गए थे। 1984 में वे राजनेता बने और 1987 में पॉलिटिकल करियर छोड़ दिया। लेकिन यह बात कम ही लोग जानते होंगे कि राजीव गांधी की हत्या के बाद उनसे दोबारा राजनीति में एंट्री को लेकर सवाल किया गया था। हालांकि, उन्होंने बड़ी ही सावधानी से टालमटोल वाला जवाब दिया था। पूछा गया था कि क्या सोनिया को सहारा देने के लिए राजनीति में आएंगे? जाने-माने ऑथर और कॉलमिस्ट राशिद किदवई ने अपनी बुक 'नेता-अभिनेता : बॉलीवुड स्टार पावर इन इंडियन पॉलिटिक्स' में लिखा है- राजीव गांधी की हत्या के एक साल बाद 1992 में अमिताभ बच्चन से पूछा गया कि क्या वे विधवा सोनिया (गांधी) को असिस्ट करने के लिए फिर से पॉलिटिक्स ज्वॉइन करेंगे? जब सोनिया गांधी भारत आईं तो उन्हें रिसीव करने अमिताभ बच्चन भी पहुंचे थे। पालम एयरपोर्ट पर 13 जनवरी, 1968 के दिन राजीव ने सोनिया को अपने जिगरी दोस्त अमिताभ से मिलवाया था। इसके बाद शादी से पहले 43 दिन तक सोनिया अमिताभ के पैरेंट्स तेजी बच्चन और हरिवंशराय बच्चन के साथ रही थीं। जवाब में उन्होंने कहा- आदत के अनुसार मैं अपने काम में पूरी तरह इन्वॉल्व हूं। मैंने काम लिया है और उसे हर कीमत पर पूरा किया है। अब मैंने अपनी फिल्मों में कटौती करने का फैसला लिया है तो लोगों को लगता है कि मैंने यह पॉलिटिक्स में आने के इरादे से किया है। जी हां, राजीव गांधी मेरे बहुत अच्छे दोस्त थे और यह भी सच है कि मैं सोनियाजी का सच्चा शुभचिंतक हूं और उनके परिवार का करीबी हूं। लेकिन मेरे पॉलिटिक्स में आने से उनकी चिंताएं और प्लान कैसे आसान हो जाएंगे? और उन्हें मेरी मदद की जरूरत क्यों है? वे बहुत स्ट्रॉन्ग, सेंसीबल और कम्पलीट इंसान हैं। अपने फैसले लेने में पूरी तरह सक्षम हैं। वे जानती हैं कि उन्हें क्या करना चाहिए और क्या नहीं? बुक में यह किस्सा सुमंत मिश्रा की बुक 'मैं अमिताभ बोल रहा हूं' के हवाले से लिखा गया है। किस्सा नं. 2 : जब अमिताभ को राजनीति में न लाने की चेतावनी दी गई गांधी और नेहरु के पारिवारिक संबंध उस समय से हैं, जब इंदिरा गांधी की शादी भी नहीं हुई थी। इलाहाबाद में नेहरु परिवार के पुश्तैनी घर आनंद भवन में सरोजनी नायडू ने हरिवंश राय बच्चन-तेजी बच्चन से इंदिरा की मुलाकात कराई थी। यहीं से इंदिरा और तेजी की दोस्ती हुई। लेकिन 80 के दशक में इस दोस्ती में तब दरार आ गई, जब इंदिरा गांधी ने तेजी बच्चन की जगह नरगिस दत्त को राज्यसभा भेजने का फैसला लिया। रिपोर्ट्स की मानें तो राजीव गांधी जब 2 साल और अमिताभ बच्चन 4 साल के थे, तब दोनों की दोस्ती हुई थी मेनका गांधी द्वारा निकाली गई मैगजीन सूर्या के एक कॉलम में इस बात का जिक्र का था कि इंदिरा गांधी के फैसले से तेजी काफी नाराज हो गई थीं। दोनों के बीच का रिश्ता काफी लंबे समय तक तनाव भरा रहा। राशिद किदवई की बुक के मुताबिक, गांधी परिवार के करीबी रहे सीनियर कांग्रेस नेता एमएल फोतेदार ने 2015 में अपने संस्मरण में लिखा था कि इंदिरा गांधी ने अपने बेटे राजीव को चेतावनी दी थी कि वे अमिताभ को राजनीति में न लाएं। उस वक्त राजीव गांधी कांग्रेस में राष्ट्रीय महासचिव थे। फोतेदार के मुताबिक, इंदिरा गांधी ने उन्हें और अरुण नेहरु को राजीव गांधी के साथ मीटिंग में बुलाया था। उन्होंने राजीव गांधी को दो काम न करने की सलाह दी थी। पहला कि वे कभी तेजी बच्चन के बेटे (अमिताभ) को राजनीति में न लाएं और दूसरा ग्वालियर के महाराज माधव राव सिंधिया को हमेशा अपने साथ रखें। किस्सा नं. 3: राजीव राजनीति में भी लाए, फिर इस्तीफा भी मांग लिया राजीव गांधी ने अपनी मां की चेतावनी को नजरअंदाज किया और 1984 में अमिताभ बच्चन को इलाहाबाद लोकसभा क्षेत्र से टिकट दिया। फोतेदार के मुताबिक, उन्हें इस बात की जानकारी मिल रही थी कि अमिताभ मंत्राालय में ऑफिसर्स के ट्रांसफर और नियुक्तियों में दखलंदाजी कर रहे थे। कई नेताओं ने भी इस बात की शिकायत की थी। अपने निर्वाचन क्षेत्र का चार्ज बिग बी ने एक ऐसे इंसान को दे दिया था, जिसे लोग गंभीरता से नहीं ले रहे थे। फोतेदार उस वक्त राजीव गांधी के राजनीतिक सचिव थे। हालांकि, उनकी मानें तो उन्होंने कभी इस बारे में राजीव गांधी को नहीं बताया। लेकिन अमिताभ न सिर्फ उत्तर प्रदेश में, बल्कि मध्य प्रदेश, राजस्थान और महाराष्ट्र सरकार में भी दखल देने लगे थे। करीब 4 साल पहले जर्नलिस्ट शेखर गुप्ता और बरखा दत्त के प्रोग्राम 'ऑफ द कफ' में अमिताभ ने कहा था- इस बात का अफसोस भी है कि मैं इलाहाबाद की जनता से किए वादे पूरे नहीं कर पाया। जितनी मेरी क्षमता थी, मैंने वादों को पूरा करने की कोशिश की। लेकिन मैं जानता हूं कि इलाहाबाद के लोग मुझे कभी माफ नहीं करेंगे। अमिताभ के इस्तीफे वाले दिन को याद करते हुए फोतेदार ने बताया, "अमिताभ उस रोज प्रधानमंत्री (राजीव गांधी) से मिलने आए थे। उस वक्त दोपहर करीब 2:45 का समय था और मैं लंच पर जाने वाला था। प्रधानमंत्री ने मुझे बुलाया। फिर हम सेवन रेस कोर्स के अंदर गए। पीएम ने एक चेयर ली और अमिताभ के दाईं ओर बैठ गए। मुझे बाईं ओर बैठने को कहा गया। इसके बाद बाद पीएम ने अमिताभ से कहा, "फोतेदार जी आपका इस्तीफा चाहते हैं।" मैं हैरान था और जाहिर तौर पर अमिताभ भी हुए होंगे। फिर अमिताभ ने कहा, "अगर फोतेदार जी मेरा इस्तीफा चाहते हैं तो मैं तैयार हूं। पेपर दीजिए और बताइए क्या लिखना है?" इसके बाद अमिताभ ने अपना इस्तीफा लिखा, जिसे लोकसभा अध्यक्ष ने स्वीकार कर लिया। Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today 80 के दशक में बच्चन- गांधी परिवार के रिश्ते में दरार की बात सामने आई थी। हालांकि, करीब चार साल पहले एक इंटरव्यू में अमिताभ बच्चन ने कहा था- "बच्चन-गांधी परिवार की दोस्ती किसी भी सूरत में खत्म नहीं हुई। हम अभी भी दोस्त हैं। https://ift.tt/34MGSNk
October 10, 2020
बिजली चोरी के मामले में यूपी के 10 और फार्महाउस संचालकों पर केस हरियाणा से यूपी के फार्म हाउसों द्वारा बिजली चोरी के मामले में दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम (डीएचबीवीएन) ने 10 और फार्म हाउस संचालकों के खिलाफ बिजली थाने में केस दर्ज कराया है। जबकि इस मामले में 34 फार्म हाउस संचालकों के खिलाफ पहले मामले दर्ज हो चुके हैं। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। निगम की ओर से फार्म हाउस संचालकों पर करीब डेढ़ करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया गया है। बिजली निगम की हिसार टीम ने पिछले दिनों बिजली चोरी के एक बड़े मामले का खुलासा किया था। इसमें फरीदाबाद से यमुना पार यूपी सीमा में बने फार्म हाउसों को बिजली दी जा रही थी। मौके पर छापामार टीम ने 11 केवी की लाइन से जुड़े 24 ट्रांसफार्मर भी पकड़े थे। इनसे उत्तरप्रदेश के फार्म हाउसों को बिजली आपूर्ति की जा रही थी। बिजली चोरी का यह खेल साल 2014 से चल रहा था। हिसार से आई टीम ने इसकी एक रिपोर्ट तैयार कर कार्रवाई के लिए फरीदाबाद सर्कल सहित उच्चाधिकारियों को सौंप दी थी। जांच के बाद करीब 250 किलोवाट लोड का आंकलन कर आरोपियों पर करीब डेढ़ करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया गया। Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today
August 02, 2020
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